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मध्यस्थता से सुलझेंगे लंबित मामले : सीजेएम नीलम कुमारी
Fri, 04 Jul 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 04 Jul 2025 11:47 PM IST
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फोटो 13मीडिएटर्स के साथ बैठक करती सीजेएम नीलम कुमारी। स्रोत प्रशासन
नारनौल। अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए 30 सितंबर तक राष्ट्रव्यापी अभियान चलेगा। सीजेएम नीलम कुमारी ने कहा कि मध्यस्थता से लंबित मामले सुलझेंगे।
यह पहल हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों और जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा के मार्गदर्शन में की जा रही है। अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम कुमारी ने एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान) केंद्र में मीडिएटर के साथ चर्चा करके रणनीति तैयार की।
सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि यह 90-दिवसीय अभियान राष्ट्र के लिए मध्यस्थता वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्राधिकरण द्वारा शुरू किया गया है।
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सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि कई तरह के मामलों में समझौतों के आधार पर समाधान निकाला जा सकता है। इससे न्यायालयों से बोझ कम होगा। दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा मामले, चेक बाउंस मामले, प्रॉपर्टी (संपत्ति) मामले, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता मामले, विभाग वसूली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, बेदखली मामले और अन्य उपयुक्त दीवानी (सिविल) व आपराधिक मामले।
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यह पहल हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों और जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा के मार्गदर्शन में की जा रही है। अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम कुमारी ने एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान) केंद्र में मीडिएटर के साथ चर्चा करके रणनीति तैयार की।
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सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि यह 90-दिवसीय अभियान राष्ट्र के लिए मध्यस्थता वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्राधिकरण द्वारा शुरू किया गया है।
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सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि कई तरह के मामलों में समझौतों के आधार पर समाधान निकाला जा सकता है। इससे न्यायालयों से बोझ कम होगा। दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा मामले, चेक बाउंस मामले, प्रॉपर्टी (संपत्ति) मामले, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता मामले, विभाग वसूली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, बेदखली मामले और अन्य उपयुक्त दीवानी (सिविल) व आपराधिक मामले।