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Mahendragarh-Narnaul News: प्रतिभागियों ने जाना व्यावहारिकता शिक्षण का महत्व
Sat, 12 Apr 2025 12:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:19 AM IST
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फोटो संख्या:63- कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता प्रो. सुनीता श्रीवास्तव को स्मृति चिह्न भेंट करते
- फोटो : mathura
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के दस दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला के पांचवें दिन विभिन्न विशेषज्ञों ने विषय से संबंधित सैद्धांतिक व व्यावहारिकता पद्धतियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने सामाजिक विज्ञानों में उपयोगी समूह चर्चा, डिस्कोर्स विश्लेषण और नृवंशविज्ञान (एथनोग्राफी) की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. एचएल जोशी ने अपने व्याख्यान में पैरामीट्रिक और नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षणों एवं डेटा विश्लेषण की विधियों पर विस्तार से चर्चा की।
हकेंवि में भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता श्रीवास्तव ने सहसंबंध (कोरिलेशन) और उसके शोध में महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। हकेंवि के स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज के अधिष्ठाता प्रो. रंजन अनेजा ने प्रतिगमन विश्लेषण के विभिन्न पहलुओं और व्यावहारिक अधिगम के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. श्रीराम पांडेय ने ई-संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सशक्त साहित्य समीक्षा लिखने के तरीकों पर प्रकाश डाला। कोर्स निदेशक और सह-निदेशक ने विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने सामाजिक विज्ञानों में उपयोगी समूह चर्चा, डिस्कोर्स विश्लेषण और नृवंशविज्ञान (एथनोग्राफी) की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. एचएल जोशी ने अपने व्याख्यान में पैरामीट्रिक और नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षणों एवं डेटा विश्लेषण की विधियों पर विस्तार से चर्चा की।
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हकेंवि में भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता श्रीवास्तव ने सहसंबंध (कोरिलेशन) और उसके शोध में महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। हकेंवि के स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज के अधिष्ठाता प्रो. रंजन अनेजा ने प्रतिगमन विश्लेषण के विभिन्न पहलुओं और व्यावहारिक अधिगम के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. श्रीराम पांडेय ने ई-संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सशक्त साहित्य समीक्षा लिखने के तरीकों पर प्रकाश डाला। कोर्स निदेशक और सह-निदेशक ने विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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