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Mahendragarh-Narnaul News: डेढ़ लाख की आबादी में मात्र 16 हजार कनेक्शन वैध
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फोटो नंबर-16नसीबपुर के जलघर में शुद्ध होता पानी। संवाद
नारनौल। डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर की प्यास बुझाने के लिए दो बड़े जलघर बनाए हैं। दोनों जलघरों से पानी शुद्ध करके सप्लाई के लिए भेजा जाता है लेकिन मेन पाइपलाइन में लीकेज व नालों के अंदर से गुजरती पेयजल लाइन के कारण यह पानी लोगों तक पहुंचते-पहुंचते दूषित हो जाता है। वहीं शहर में मात्र 16 हजार पेयजल कनेक्शन वैध हैं।
शहर के कई मुख्य मार्ग महेंद्रगढ़ रोड, तालाब बहादुर सिंह रोड, सैन चौक, खड़खड़ी, मिश्रवाड़ा व चौधरियान में लीक पाइपलाइनों से पानी निकलता रहता है। इसके अलावा, शहर में कई स्थानों पर लोगों के नल के पाइपनालों व नालियों में जा रहे है जो थोड़ा सी भी टूटने के कारण गंदा पानी सप्लाई करना शुरू कर देते हैं।
इसके अलावा आठ दस हजार के करीब तो शहर में ऐसे नल पड़े हैं जो लोगों ने नए कनेक्शन लगाने के बाद ऐसे ही खुले छोड़ दिए और ये सबसे ज्यादा गंदे पानी की सप्लाई का कारण बन रहे हैं।
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वहीं,
शहर में विभिन्न स्थानों पर 18 के करीब बूस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों के टैंकों को ढकने के उचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा कर्मचारी भी 24 घंटे तैनात नहीं रहते है। कई बूस्टिंग स्टेशनों में असामाजिक तत्व भी बैठे रहते है और नशा भी करते हैं। इस तरह असुरक्षित बूस्टिंग स्टेशन भी खतरे का कारण बन सकते है।
बाक्स-
पुरानी सराय व सैन चौक के आसपास कई बार गंदे पानी की सप्लाई होती है। यहां सैन चौक के आसपास भी लाइन की ठीक से जांच करानी चाहिए। -नरेश मित्तल निवासी सैन चौक निवासी
बाक्स-
शहर में गंदे पानी सप्लाई का करण बन रहे अवैध कनेक्शनों की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, बूस्टिंग स्टेशन की सुरक्षा पर भी विभाग को देना चाहिए।-जयप्रकाश निवासी संघीवाड़ा निवासी
वर्जन:
शहर में गंदा पानी सप्लाई होने का सबसे बड़ा करण अवैध कनेक्शन हैं। विभाग समय-समय इसके लिए अभियान चलाता है। जहां लाइनें लीक की शिकायत मिलती है उन्हें भी ठीक कराया जाता है। वहीं मेन लाइनों में कनेक्शन न ले, नया नल लगाने पर पुराने नल को पूर्ण रूप से बंद करें, उसे खुला न छोड़े। -मुकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल
वाटर टैंकों में पशु-पक्षियों के मरने के भी आएं हैं मामले
शहर के नसीबपुर जलघर के वाटर टैंक में करीब पांच साल पहले एक नील गाय गिरकर मर गई थी। वहीं हुडा सेक्टर के जलघर में कुछ सालों पहले कुछ कबूतर मर गए थे। जलघरों और वाटर टैंकों में पशु-पक्षियों के बचाव के भी पुख्ता प्रबंध होने चाहिए।
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शहर के कई मुख्य मार्ग महेंद्रगढ़ रोड, तालाब बहादुर सिंह रोड, सैन चौक, खड़खड़ी, मिश्रवाड़ा व चौधरियान में लीक पाइपलाइनों से पानी निकलता रहता है। इसके अलावा, शहर में कई स्थानों पर लोगों के नल के पाइपनालों व नालियों में जा रहे है जो थोड़ा सी भी टूटने के कारण गंदा पानी सप्लाई करना शुरू कर देते हैं।
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इसके अलावा आठ दस हजार के करीब तो शहर में ऐसे नल पड़े हैं जो लोगों ने नए कनेक्शन लगाने के बाद ऐसे ही खुले छोड़ दिए और ये सबसे ज्यादा गंदे पानी की सप्लाई का कारण बन रहे हैं।
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वहीं,
शहर में विभिन्न स्थानों पर 18 के करीब बूस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों के टैंकों को ढकने के उचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा कर्मचारी भी 24 घंटे तैनात नहीं रहते है। कई बूस्टिंग स्टेशनों में असामाजिक तत्व भी बैठे रहते है और नशा भी करते हैं। इस तरह असुरक्षित बूस्टिंग स्टेशन भी खतरे का कारण बन सकते है।
बाक्स-
पुरानी सराय व सैन चौक के आसपास कई बार गंदे पानी की सप्लाई होती है। यहां सैन चौक के आसपास भी लाइन की ठीक से जांच करानी चाहिए। -नरेश मित्तल निवासी सैन चौक निवासी
बाक्स-
शहर में गंदे पानी सप्लाई का करण बन रहे अवैध कनेक्शनों की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, बूस्टिंग स्टेशन की सुरक्षा पर भी विभाग को देना चाहिए।-जयप्रकाश निवासी संघीवाड़ा निवासी
वर्जन:
शहर में गंदा पानी सप्लाई होने का सबसे बड़ा करण अवैध कनेक्शन हैं। विभाग समय-समय इसके लिए अभियान चलाता है। जहां लाइनें लीक की शिकायत मिलती है उन्हें भी ठीक कराया जाता है। वहीं मेन लाइनों में कनेक्शन न ले, नया नल लगाने पर पुराने नल को पूर्ण रूप से बंद करें, उसे खुला न छोड़े। -मुकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल
वाटर टैंकों में पशु-पक्षियों के मरने के भी आएं हैं मामले
शहर के नसीबपुर जलघर के वाटर टैंक में करीब पांच साल पहले एक नील गाय गिरकर मर गई थी। वहीं हुडा सेक्टर के जलघर में कुछ सालों पहले कुछ कबूतर मर गए थे। जलघरों और वाटर टैंकों में पशु-पक्षियों के बचाव के भी पुख्ता प्रबंध होने चाहिए।