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Mahendragarh-Narnaul News: समाज सुधार अभियान में मृत्यु भोज, टीका प्रथा और दिखावे का विरोध
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फोटो 11 सामाजिक कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करते जाट समाज पदाधिकारी।संवाद
नांगल चौधरी/निजामपुर। जाट समाज के प्रधान कुलदीप के नेतृत्व में समाज सुधार अभियान के तहत पवेरा, नापला, निजामपुर, ढाणी अलगोजियां और दनचोली गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और समाज में सादगी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। लोगों से मृत्यु भोज, टीका प्रथा और दिखावे की परंपराओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया।
मुख्य वक्ता सतपाल दहिया ने कहा कि समाज को तय करना होगा कि वह रिश्तों को मजबूत करना चाहता है या अनावश्यक रस्मों के बोझ में दबना। उन्होंने कहा कि ‘तू क्या किसी से कम है’ जैसी सोच लोगों को दिखावे और प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाती है। इससे परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
उन्होंने मृत्यु भोज की परंपरा पर कहा कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद परिवार पहले ही दुख में होता है। ऐसे समय में भोज का आयोजन करना उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
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रामनिवास सरपंच ने मृत्यु के बाद होने वाले टीके के लेन-देन को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि शोक के समय आर्थिक लेन-देन की रस्मों के बजाय परिवार के दुख में साथ खड़ा होना अधिक जरूरी है। ओमप्रकाश थानेदार ने शुभ अवसरों पर बेटियों से जुड़े लेन-देन की परंपराओं पर भी चिंता जताई।
कार्यक्रम में पवन दोंगली भारतीय, सतवीर बडेसरा, जसवंत सिरोही, तारीफ सिंह, हजारीलाल लांबोरा, दिलीप मोहनपुर, लीलाराम सरपंच, ईश्वर तोताहेड़ी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता सतपाल दहिया ने कहा कि समाज को तय करना होगा कि वह रिश्तों को मजबूत करना चाहता है या अनावश्यक रस्मों के बोझ में दबना। उन्होंने कहा कि ‘तू क्या किसी से कम है’ जैसी सोच लोगों को दिखावे और प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाती है। इससे परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
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उन्होंने मृत्यु भोज की परंपरा पर कहा कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद परिवार पहले ही दुख में होता है। ऐसे समय में भोज का आयोजन करना उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
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रामनिवास सरपंच ने मृत्यु के बाद होने वाले टीके के लेन-देन को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि शोक के समय आर्थिक लेन-देन की रस्मों के बजाय परिवार के दुख में साथ खड़ा होना अधिक जरूरी है। ओमप्रकाश थानेदार ने शुभ अवसरों पर बेटियों से जुड़े लेन-देन की परंपराओं पर भी चिंता जताई।
कार्यक्रम में पवन दोंगली भारतीय, सतवीर बडेसरा, जसवंत सिरोही, तारीफ सिंह, हजारीलाल लांबोरा, दिलीप मोहनपुर, लीलाराम सरपंच, ईश्वर तोताहेड़ी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।