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किसानों एवं व्यापारियों को रास नहीं आ रही भावांतर भरपाई योजना, दूसरे दिन भी मंडी में नहीं पहुंचे किसान

Sat, 02 Oct 2021 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 11:27 PM IST
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No message came till late evening... not a single farmer reached the market on the second day
महेंद्रगढ़। सरकार की भावांतर भरपाई योजना को लेकर किसानों एवं आढ़तियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों के पास उपज खरीद को लेकर अभी तक कोई सूचना भी नहीं आई है। वहीं व्यापारियों में भी फसल खरीद को लेकर असमंजस है कि सरकार यह उपज आढ़तियों के माध्यम से खरीद कराएगी या फिर सीधे खरीद एजेंसियों से एक अक्तूबर से खरीद शुरू होनी थी, दो दिन बीत जाने के बाद भी महेंद्रगढ़ मंडी में कोई किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचा।
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जिले के 12 खरीद केंद्रों पर एक अक्तूबर से बाजरे की खरीद शुरू होनी थी। सूचना के अभाव में किसान भी असमंजस की स्थिति में है। किसानों को न ही मोबाइल पर संदेश दिया गया है और न ही मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर कोई उपज बिक्री का विकल्प दिया गया है। वहीं किसानों व आढ़तियों की मानें तो सरकार की यह भावांतर भरपाई योजना दोनों को रास नहीं आ रही है। आढ़तियों के अनुसार वर्ष में दो बार खरीफ एवं रबी फसलों की उपज बिक्री होती है। पहले व्यापारी भी वर्ष में दो बार आढ़त मिलने से अपनी आजीविका चलाते थे। लेकिन अब आढ़त बंद होने से व्यापारियों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा होने की संभावना है। सरकार द्वारा बाजरे का समर्थन मूल्य 2250 रुपये तय किया गया है जबकि 600 रुपये सरकार द्वारा सीधे किसानों के खातों में डालने की योजना है। लेकिन किसान की उपज खरीद का अभी तक कोई संदेेश भी किसानों तक नहीं पहुंचाया है।
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- संदेश का है इंतजार:
क्षेत्र के करीब 50 प्रतिशत किसानों ने बाजरे की उपज खेतों से घर पहुंचा दी है। अब उन्हें बिक्री का इंतजार है। किसान सरकार द्वारा संदेश भेजने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन भावांतर भरपाई योजना को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं। एक एकड़ में आठ क्विंटल के हिसाब से उनकी खरीद सरकार करेगी या व्यापारी, इसको लेकर अभी तक कोई सूचना नहीं।
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- किसान सतीश शर्मा राठीवास।
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- कौन खरीदेगा 75 प्रतिशत उपज:
सरकार की घोषणा के अनुसार 600 रुपये भावांतर योजना के तहत सीधे किसान के खाते में जाएंगे। लेकिन 1650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसान की फसल की खरीद कौन करेगा इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार महज 25 प्रतिशत की खरीद करेगी। - किसान दलबीर सिंह अगिहार,
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- व्यापारी व किसान दोनों को नुकसान:
भावांतर भरपाई योजना के तहत 25 प्रतिशत उपज खरीद कर 600 रुपये की राशि प्रति क्विंटल के हिसाब से किसान के खाते में डालने की घोषणा तो सरकार ने कर दी। लेकिन बची हुई 75 प्रतिशत फसल की खरीद आखिर कौन करेगा। आढ़ती वर्ष में दो बार इस समय का इंतजार करते हैं। लेकिन सरकार की यह योजना किसान एवं व्यापारी किसी के हित में भी नहीं है।

- प्रधान अनाज मंडी व्यापार मंडल, बिजेंद्र सिंह
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- आढ़त खत्म होने से व्यापारियों के समक्ष चुनौती:
सरकार एक तरफ तो अधिकतम समर्थन मूल्य निर्धारित करती है लेकिन दूसरी और इस योजना से किसान एवं व्यापारी दोनों को ही नुकसान है। सरकार आढ़तियों के व्यापार को पूरी तरह से बंद करना चाहती है। यह योजना न किसान हित में है और न ही व्यापारी हित में। - उप प्रधान व्यापार मंडल अनाज मंडी, विकास कुमार
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