{"_id":"68b9f4832ef1bb2de70f686c","slug":"nirf-rankinghkv-could-not-even-make-it-to-the-top-200-narnol-news-c-17-1-rtk1042-721671-2025-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: एनआईआरएफ रैंकिंग....टॉप-200में भी जगह नहीं बना सका हकेंवि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: एनआईआरएफ रैंकिंग....टॉप-200में भी जगह नहीं बना सका हकेंवि
Fri, 05 Sep 2025 01:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:50 AM IST
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) इंडिया रैंकिंग-2025 में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का निराशाजनक प्रदर्शन रहा। प्रदेश का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में टॉप-200 में भी जगह नहीं बना सका।
साल 2009 में स्थापित हकेंवि से यह अपेक्षा रहती है कि यह संस्थान न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में शिक्षा और शोध का एक मजबूत केंद्र बनेगा। महेंद्रगढ़ जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्र में इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण अंचलों के छात्रों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और शोध की सुविधा उपलब्ध कराना था।
अफसोस डेढ़ दशक बाद भी विश्वविद्यालय अपनी साख और पहचान बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से उम्मीद थी कि यहां शोध कार्य, पेटेंट, आधुनिक प्रयोगशालाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर प्लेसमेंट के जरिए प्रदेश की शिक्षा जगत में नई ऊर्जा का संचार होगा लेकिन एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार गिरते प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
विज्ञापन
प्लेसमेंट पर भी पड़ता है सीधा असर
रैंकिंग में जगह न बना पाने का असर छात्रों के प्लेसमेंट पर साफ तौर पर देखा जाता है। बड़ी कंपनियां और मल्टीनेशनल संस्थान उन्हीं विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता देते हैं जो एनआईआरएफ की सूची में बेहतर स्थान पर हों। रैंकिंग न होने पर विश्वविद्यालय का कैंपस भर्ती कार्यक्रम कमजोर पड़ जाता है और नामी कंपनियां ऐसे संस्थानों में जाना ही पसंद नहीं करतीं। इससे छात्रों के लिए बेहतर अवसरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं और उन्हें छोटे स्तर की नौकरियों या फिर कैंपस से बाहर संघर्ष करना पड़ता है।
प्रदेश के दो निजी विवि टॉप-100 में शामिल
हरियाणा प्रदेश की बात करें तो टॉप-100 में केवल दो निजी विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में स्थान बना सके हैं। इनमें अंबाला के महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय को 85वीं रैंक और फरीदाबाद के मनव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज को 96वीं रैंक मिली है।
इस बार 17 श्रेणियों में जारी की गई रैंकिंग
एनआईआरएफ की इस बार की रैंकिंग 17 श्रेणियों में जारी हुई है। खास बात यह रही कि इसमें पहली बार सतत विकास लक्ष्य को भी एक नई श्रेणी के रूप में शामिल किया गया। रैंकिंग तैयार करने में छात्रों की संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात, पीएचडी धारक शिक्षक, शोध कार्य, पेटेंट, प्लेसमेंट, वित्तीय प्रबंधन, महिला व दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं, पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन, भारतीय भाषाओं में शिक्षा और संस्थान की आम धारणा जैसे मानक शामिल किए गए।
विज्ञापन
साल 2009 में स्थापित हकेंवि से यह अपेक्षा रहती है कि यह संस्थान न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में शिक्षा और शोध का एक मजबूत केंद्र बनेगा। महेंद्रगढ़ जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्र में इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण अंचलों के छात्रों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और शोध की सुविधा उपलब्ध कराना था।
विज्ञापन
अफसोस डेढ़ दशक बाद भी विश्वविद्यालय अपनी साख और पहचान बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से उम्मीद थी कि यहां शोध कार्य, पेटेंट, आधुनिक प्रयोगशालाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर प्लेसमेंट के जरिए प्रदेश की शिक्षा जगत में नई ऊर्जा का संचार होगा लेकिन एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार गिरते प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
विज्ञापन
प्लेसमेंट पर भी पड़ता है सीधा असर
रैंकिंग में जगह न बना पाने का असर छात्रों के प्लेसमेंट पर साफ तौर पर देखा जाता है। बड़ी कंपनियां और मल्टीनेशनल संस्थान उन्हीं विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता देते हैं जो एनआईआरएफ की सूची में बेहतर स्थान पर हों। रैंकिंग न होने पर विश्वविद्यालय का कैंपस भर्ती कार्यक्रम कमजोर पड़ जाता है और नामी कंपनियां ऐसे संस्थानों में जाना ही पसंद नहीं करतीं। इससे छात्रों के लिए बेहतर अवसरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं और उन्हें छोटे स्तर की नौकरियों या फिर कैंपस से बाहर संघर्ष करना पड़ता है।
प्रदेश के दो निजी विवि टॉप-100 में शामिल
हरियाणा प्रदेश की बात करें तो टॉप-100 में केवल दो निजी विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में स्थान बना सके हैं। इनमें अंबाला के महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय को 85वीं रैंक और फरीदाबाद के मनव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज को 96वीं रैंक मिली है।
इस बार 17 श्रेणियों में जारी की गई रैंकिंग
एनआईआरएफ की इस बार की रैंकिंग 17 श्रेणियों में जारी हुई है। खास बात यह रही कि इसमें पहली बार सतत विकास लक्ष्य को भी एक नई श्रेणी के रूप में शामिल किया गया। रैंकिंग तैयार करने में छात्रों की संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात, पीएचडी धारक शिक्षक, शोध कार्य, पेटेंट, प्लेसमेंट, वित्तीय प्रबंधन, महिला व दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं, पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन, भारतीय भाषाओं में शिक्षा और संस्थान की आम धारणा जैसे मानक शामिल किए गए।