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Mahendragarh-Narnaul News: 3 अक्टूबर से होगा मां दुर्गा शक्ति का महापर्व नवरात्र का प्रारंभ
Wed, 02 Oct 2024 05:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 02 Oct 2024 05:45 AM IST
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महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि दुर्गा शक्ति के साधना का पर्व यानी अश्विनी मास के शारदीय नवरात्र का प्रारंभ तीन अक्तूबर से शुरू होकर 12 अक्तूबर तक चलेगा।
इस बार एक नवरात्र की वृद्धि हो रही है, जिससे श्रेष्ठ माना गया है। पांच व छह अक्तूबर को तृतीया तिथि रहेगी। इस वजह से इस बार 9 नहीं 10 नवरात्र होंगे। नवमी और विजय दशमी एक ही दिन मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि नवरात्र के इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है।
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री नाम से जाना जाता है। मां के इन स्वरूपों की मुख्य रूप से पूजा अर्चना की जाती है। माता कृपा प्राप्ति के लिए अखंड ज्योत लगाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा और माता के विभिन्न स्रोतों का पाठ करना चाहिए।
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इंसेट
- कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश (घट) स्थापना की जाती है। जौ बोए जाते हैं। जो सुख समृद्धि का प्रतीक माने गए हैं। शुभ मुहूर्त सुबह 6:21 से सुबह 7:49 तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:38 बजे रहेगा। शुभ मुहूर्त में किया कार्य पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है। इसके अलावा नवरात्र में बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं, जो किसी भी शुभ कार्य जैसे, वाहन, भवन, जमीन, आभूषण खरीददारी के लिए शुभ माने गए है।
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- यह बन रहे हैं इस बार योग:
3 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, ऐंद्र योग
5 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, प्रीति योग, रवि योग, सिद्ध योग
6 अक्टूबर- प्रीति योग,रवि योग
7 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, मानस योग, रवि योग
8 अक्टूबर- आयुष्मान योग,रवि योग
9 अक्टूबर- ध्वज योग, शोभन योग
10 अक्टूबर- धाता योग
11 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, आनंद योग, रवि योग
12अक्टूबर-सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग
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- माता की सवारी पालकी होंगी
उन्होंने बताया कि वैसे तो माता दुर्गा की सवारी शेर होता है, लेकिन नवरात्र में धरती पर आते समय माता की सवारी बदल जाती है। माता की सवारी नवरात्र शुरू होने वाले दिन पर निर्भर करती है। इस वार नवरात्र वीरवार से प्रारंभ हो रहा है। रहे है। इस कारण माता की सवारी पालकी (डोली) होगी। माता पालकी में सवार होकर आ रही हैं, इसे सही नहीं माना जाता है। मां दुर्गा का पालकी में आना अशुभ माना जाता है। इससे इस बात की ओर इशारा होता है कि देश को आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है।
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इस बार एक नवरात्र की वृद्धि हो रही है, जिससे श्रेष्ठ माना गया है। पांच व छह अक्तूबर को तृतीया तिथि रहेगी। इस वजह से इस बार 9 नहीं 10 नवरात्र होंगे। नवमी और विजय दशमी एक ही दिन मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि नवरात्र के इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है।
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शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री नाम से जाना जाता है। मां के इन स्वरूपों की मुख्य रूप से पूजा अर्चना की जाती है। माता कृपा प्राप्ति के लिए अखंड ज्योत लगाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा और माता के विभिन्न स्रोतों का पाठ करना चाहिए।
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- कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश (घट) स्थापना की जाती है। जौ बोए जाते हैं। जो सुख समृद्धि का प्रतीक माने गए हैं। शुभ मुहूर्त सुबह 6:21 से सुबह 7:49 तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:38 बजे रहेगा। शुभ मुहूर्त में किया कार्य पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है। इसके अलावा नवरात्र में बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं, जो किसी भी शुभ कार्य जैसे, वाहन, भवन, जमीन, आभूषण खरीददारी के लिए शुभ माने गए है।
- यह बन रहे हैं इस बार योग:
3 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, ऐंद्र योग
5 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, प्रीति योग, रवि योग, सिद्ध योग
6 अक्टूबर- प्रीति योग,रवि योग
7 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, मानस योग, रवि योग
8 अक्टूबर- आयुष्मान योग,रवि योग
9 अक्टूबर- ध्वज योग, शोभन योग
10 अक्टूबर- धाता योग
11 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्ध योग, आनंद योग, रवि योग
12अक्टूबर-सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग
- माता की सवारी पालकी होंगी
उन्होंने बताया कि वैसे तो माता दुर्गा की सवारी शेर होता है, लेकिन नवरात्र में धरती पर आते समय माता की सवारी बदल जाती है। माता की सवारी नवरात्र शुरू होने वाले दिन पर निर्भर करती है। इस वार नवरात्र वीरवार से प्रारंभ हो रहा है। रहे है। इस कारण माता की सवारी पालकी (डोली) होगी। माता पालकी में सवार होकर आ रही हैं, इसे सही नहीं माना जाता है। मां दुर्गा का पालकी में आना अशुभ माना जाता है। इससे इस बात की ओर इशारा होता है कि देश को आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है।