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Mahendragarh-Narnaul News: नर्मदा से बाणलिंग की उत्पत्ति की कथा सुनाई
Sat, 26 Jul 2025 12:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 26 Jul 2025 12:07 AM IST
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फोटो संख्या:66- प्राचीन हनुमान मंदिर सैनीपुरा में शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं को कथा सुना
- फोटो : अछल्दा रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रैक पर लेटा युवक।
महेंद्रगढ़। प्राचीन हनुमान मंदिर सैनीपुरा में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं को नर्मदा से बाणलिंग की उत्पत्ति की कथा सुनाई गई।
कथा व्यास पंडित विकास शास्त्री ने बताया कि शिवलिंग की उत्पत्ति को लेकर यह कथा मिलती है कि नर्मदेश्वर या बाणलिंग शिवलिंग की उत्पत्ति भगवान शिव के एक दिव्य बाण से हुई थी। जब भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया तो उनके धनुष से एक शक्तिशाली बाण गिरा। इस बाण के गिरने से नर्मदा नदी के जल में शिवलिंग उत्पन्न हो गए। यही कारण है कि नर्मदा नदी के शिवलिंग को बाणलिंग भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में प्राकृतिक शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व है।
विशेषकर स्वयंभू (स्वयंसिद्ध) शिवलिंग पूजा से गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है। ऐसे ही प्राकृतिक और स्वयंभू शिवलिंगों में प्रसिद्ध है बाणलिंग। पवित्र नर्मदा नदी के किनारे पाया जाने वाला एक विशेष गुणों वाला पाषाण ही बाणलिंग कहलाता है। बाणलिंग शिव का ही एक रूप माना जाता है।
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कथा व्यास पंडित विकास शास्त्री ने बताया कि शिवलिंग की उत्पत्ति को लेकर यह कथा मिलती है कि नर्मदेश्वर या बाणलिंग शिवलिंग की उत्पत्ति भगवान शिव के एक दिव्य बाण से हुई थी। जब भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया तो उनके धनुष से एक शक्तिशाली बाण गिरा। इस बाण के गिरने से नर्मदा नदी के जल में शिवलिंग उत्पन्न हो गए। यही कारण है कि नर्मदा नदी के शिवलिंग को बाणलिंग भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में प्राकृतिक शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व है।
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विशेषकर स्वयंभू (स्वयंसिद्ध) शिवलिंग पूजा से गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है। ऐसे ही प्राकृतिक और स्वयंभू शिवलिंगों में प्रसिद्ध है बाणलिंग। पवित्र नर्मदा नदी के किनारे पाया जाने वाला एक विशेष गुणों वाला पाषाण ही बाणलिंग कहलाता है। बाणलिंग शिव का ही एक रूप माना जाता है।
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