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सीएम फ्लाइंग ने 15 पंचायतों का रिकार्ड कब्जे में लिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Aug 2016 11:49 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : अमर उजाला
नांगल चौधरी। डस्टबीन खरीद में कमीशनखोरी का मामला उजागर होने के बाद सीएम फ्लाइंग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। टीम ने निजामपुर और नांगल चौधरी खंड की 15 पंचायतों की छानबीन कर रिकार्ड कब्जे में लिया है। आरोपी सरपंचों से विक्रेता फर्म और कोटेशन प्राप्त होने संबंधित जानकारी ली गई है। अधिकतर सरपंच संतोषजनक जवाब देने में असमर्थ रहे हैं।
डस्टबीन खरीद में कमीशनखोरी का मामला उजागर होने के बाद मंगलवार को सीएम फ्लाइंग की टीम नांगल चौधरी के गांवों में पहुंची। अधिकारियों ने बीडीपीओ कार्यालय से रिकार्ड कब्जे में लेकर जांच आरंभ कर दी है। जानकारी के अनुसार विभागीय और पंचायती कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई के आदेश हैं। आदेशों की आड़ लेकर अधिकांश पंचायतों ने पिछले दिनों डस्टबीन खरीदे थे। विक्रेता फर्म को विभिन्न टैक्सों समेत 4200-4600 प्रति डस्टबीन भुगतान किया गया। यही डस्टबीन बाजार में 1200 से 1400 रुपये तक में मिल सकते थे। मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीसी संजीव वर्मा ने एडीसी और डीडीपीओ को जांच के आदेश दिए। अधिकारियों ने पंचायत स्तर पर कूडे़दानों की गिनती की और पंचायतों से प्रस्ताव लिए। इस दौरान दो पंचायतों में बिल भुगतान होने के बावजूद डस्टबीन नहीं खरीदे गए। कई सरपंचों ने कम कूडे़दान लगाकर खानापूर्ति कर ली।
यह हैं नियम
निर्धारित मापदंड के अनुसार खरीद से पहले पंचायतों को कमेटी गठित करनी चाहिए थी। इसके बाद कमेटी सदस्य को फर्मों पर पहुंचकर मोलभाव करनी थी। दुकानदारों से कोटेशन लेनी थी, सबसे कम कीमत की कोटेशन वाली फर्म से ही खरीदारी करनी थी। नांगल चौधरी ब्लॉक की अधिकतर पंचायतों ने नियमों का अनुसरण नहीं किया। मीडिया में खुलासा होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। मामले की भनक लगने पर जांच सीएम फ्लाइंग को सौंपी गई। पिछले सप्ताह निजामपुर और नांगल चौधरी खंड की 15 पंचायतों में छानबीन की गई। आरोपी सरपंचों से विक्रेता फर्म कहां स्थापित है, कोटेशन प्राप्त होने संबंधित जानकारी ली गई है। सूत्रों की माने तो अधिकतर सरपंच संतोषजनक जवाब देने में असमर्थ रहे।
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फर्जी कोटेशन को बनाया असली
लिखाई और हस्ताक्षरों से साबित होता है कि एक ही दुकानदार ने तीन कोटेशन उपलब्ध करवाई हैं। इन्हीं कोटेशन को सरपंचों ने तस्दीक कर सही करार दिया है। जिनकी जांच होने पर सरपंच और विक्रेताओं की मिलीभगत उजागर हो जाएगी। इसके अलावा बिलों पर डस्टबीन का वजन, गेज अंकित नहीं है। इससे जांच के दौरान विभाग को असुविधा रहे।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
बीडीपीओ दीपक यादव ने बताया कि डस्टबीन खरीद में धांधली के मामले की जांच सीएम फ्लाइंग कर रही है। अधिकारियों को संबंधित रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया है। अधिकारी फर्म मालिक और सरपंचों के बयान दर्ज कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही आगामी कार्रवाई संभव होगी।
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डस्टबीन खरीद में कमीशनखोरी का मामला उजागर होने के बाद मंगलवार को सीएम फ्लाइंग की टीम नांगल चौधरी के गांवों में पहुंची। अधिकारियों ने बीडीपीओ कार्यालय से रिकार्ड कब्जे में लेकर जांच आरंभ कर दी है। जानकारी के अनुसार विभागीय और पंचायती कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई के आदेश हैं। आदेशों की आड़ लेकर अधिकांश पंचायतों ने पिछले दिनों डस्टबीन खरीदे थे। विक्रेता फर्म को विभिन्न टैक्सों समेत 4200-4600 प्रति डस्टबीन भुगतान किया गया। यही डस्टबीन बाजार में 1200 से 1400 रुपये तक में मिल सकते थे। मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीसी संजीव वर्मा ने एडीसी और डीडीपीओ को जांच के आदेश दिए। अधिकारियों ने पंचायत स्तर पर कूडे़दानों की गिनती की और पंचायतों से प्रस्ताव लिए। इस दौरान दो पंचायतों में बिल भुगतान होने के बावजूद डस्टबीन नहीं खरीदे गए। कई सरपंचों ने कम कूडे़दान लगाकर खानापूर्ति कर ली।
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यह हैं नियम
निर्धारित मापदंड के अनुसार खरीद से पहले पंचायतों को कमेटी गठित करनी चाहिए थी। इसके बाद कमेटी सदस्य को फर्मों पर पहुंचकर मोलभाव करनी थी। दुकानदारों से कोटेशन लेनी थी, सबसे कम कीमत की कोटेशन वाली फर्म से ही खरीदारी करनी थी। नांगल चौधरी ब्लॉक की अधिकतर पंचायतों ने नियमों का अनुसरण नहीं किया। मीडिया में खुलासा होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। मामले की भनक लगने पर जांच सीएम फ्लाइंग को सौंपी गई। पिछले सप्ताह निजामपुर और नांगल चौधरी खंड की 15 पंचायतों में छानबीन की गई। आरोपी सरपंचों से विक्रेता फर्म कहां स्थापित है, कोटेशन प्राप्त होने संबंधित जानकारी ली गई है। सूत्रों की माने तो अधिकतर सरपंच संतोषजनक जवाब देने में असमर्थ रहे।
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फर्जी कोटेशन को बनाया असली
लिखाई और हस्ताक्षरों से साबित होता है कि एक ही दुकानदार ने तीन कोटेशन उपलब्ध करवाई हैं। इन्हीं कोटेशन को सरपंचों ने तस्दीक कर सही करार दिया है। जिनकी जांच होने पर सरपंच और विक्रेताओं की मिलीभगत उजागर हो जाएगी। इसके अलावा बिलों पर डस्टबीन का वजन, गेज अंकित नहीं है। इससे जांच के दौरान विभाग को असुविधा रहे।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
बीडीपीओ दीपक यादव ने बताया कि डस्टबीन खरीद में धांधली के मामले की जांच सीएम फ्लाइंग कर रही है। अधिकारियों को संबंधित रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया है। अधिकारी फर्म मालिक और सरपंचों के बयान दर्ज कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही आगामी कार्रवाई संभव होगी।