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एक मिनट में 6 नारियलों को छील कर शिवकांत ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाया नाम
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गांव गणियार निवासी शिवकांत नारियल छिलता हुआ।
- फोटो : Narnol
मंडी अटेली। गणियार निवासी शिवकांत भारद्वाज मात्र एक मिनट में छह नारियल को छील देते हैं। उन्होंने हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के विश्वजीत बर्मन के नाम था। जोकि एक मिनट में 5 नारियलों को छील चुके हैं। शिवकांत को नया रिकॉर्ड बनाने पर मेडल व प्रमाण पत्र जल्द एक समारोह में दिए जाएंगे।
रिकॉर्ड को चेक करने के लिए 30 सितंबर को दिल्ली, फरीदाबाद के अलावा अनेक जगह वीडियो लिया तथा टेस्ट हुआ था। शिवकांत स्नातक तक पढ़ाई कर चुका है। उसका जन्म 10 जनवरी 1984 को गांव गणियार में हुआ है। तीन साल पहले नवरात्रों के उपलक्ष्य पर घर में नारियल लाने पर छीलने के लिए पेचकस आदि न मिलने पर दांतों से छिलने की शुरूआत की। धीरे-धीरे उसके बाद अभ्यास करने लग गया। एक दिन सोशल मीडिया पर नारियल छीलने का वीडियो देखा तथा रिकार्ड के बारे में भी जानकारी ली।
तीन साल के कड़े अभ्यास में नारियल छीलने का रिकार्ड बनाया है। शिवकांत ने बताया कि वह टूथपेस्ट बहुत कम करता है। बचपन से ही नीम व दूसरी दातून करता रहा है। हमारे गांव में वन क्षेत्र होने के कारण अक्सर घूमता है तथा वहां पर झोझरू के पौधे से वह पिछले तीन साल से दातुन कर रहा है। इस दातून के करने से उसके मसूडे़ मजबूत होने के साथ दांतों को भी मजबूती मिली है। उसने बताया उसका अगला लक्ष्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है। उस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है, अगर सरकार व प्रशासन का सहयोग रहा तो जल्द इसको रिकार्ड को तोड़कर देश व क्षेत्र के नाम रोशन करना चाहता है।
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रिकॉर्ड को चेक करने के लिए 30 सितंबर को दिल्ली, फरीदाबाद के अलावा अनेक जगह वीडियो लिया तथा टेस्ट हुआ था। शिवकांत स्नातक तक पढ़ाई कर चुका है। उसका जन्म 10 जनवरी 1984 को गांव गणियार में हुआ है। तीन साल पहले नवरात्रों के उपलक्ष्य पर घर में नारियल लाने पर छीलने के लिए पेचकस आदि न मिलने पर दांतों से छिलने की शुरूआत की। धीरे-धीरे उसके बाद अभ्यास करने लग गया। एक दिन सोशल मीडिया पर नारियल छीलने का वीडियो देखा तथा रिकार्ड के बारे में भी जानकारी ली।
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तीन साल के कड़े अभ्यास में नारियल छीलने का रिकार्ड बनाया है। शिवकांत ने बताया कि वह टूथपेस्ट बहुत कम करता है। बचपन से ही नीम व दूसरी दातून करता रहा है। हमारे गांव में वन क्षेत्र होने के कारण अक्सर घूमता है तथा वहां पर झोझरू के पौधे से वह पिछले तीन साल से दातुन कर रहा है। इस दातून के करने से उसके मसूडे़ मजबूत होने के साथ दांतों को भी मजबूती मिली है। उसने बताया उसका अगला लक्ष्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है। उस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है, अगर सरकार व प्रशासन का सहयोग रहा तो जल्द इसको रिकार्ड को तोड़कर देश व क्षेत्र के नाम रोशन करना चाहता है।
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