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नाम न मोबाइल नंबर, किसकी करें शिकायत
narnaul
Updated Fri, 02 May 2014 01:00 AM IST
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ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से अधिक किराया और अभद्र व्यवहार की शिकायतें तो आम हैं। ऑटो चालक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं और जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी ऑटो के पीछे चालक का नाम और मोबाइल नंबर लिखने के आदेश दिए थे, लेकिन शहर में किसी भी ऑटो पर न तो मोबाइल नंबर लिखा है और न ही चालक का नाम।
दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर आदेश जारी किया था कि सभी चालक ऑटो पर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखवाएंगे। यह आदेश इसलिए जारी किए थे कि यदि किसी सवारी को ऑटो में कोई दिक्कत पेश आती है तो वह चालक के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत कर सकता है। चालकों ने इन आदेशों का पालन करने में पूरी तरह से उदासीनता बरत रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन और पुलिस ने भी इन आदेशों का पालन कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
सुरक्षा के लिए उठाया था कदम
अक्सर अधिकारियों को शिकायत मिलती रहती है कि ऑटो चालक यात्रियों से अधिक किराया वसूलते हैं। दिन में तो अधिक किराया वसूलने से चालक गुरेज करते हैं लेकिन रात में 2 से 3 गुणा किराया वसूलते हैं। कोई विरोध करता है तो सवारी के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। सवारी अगर शिकायत करती तो उनके पास ऑटो चालक का न तो नाम होता है और न ही मोबाइल नंबर। सवारी को शिकायत करने में कोई दिक्कत न हो इसलिए चालक का नाम और मोबाइल नंबर ऑटो पर लिखवाने के आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने दिए थे।
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पुलिस कंट्रोल नंबर भी नहीं है
नारनौल शहर में ही इन ऑटों की संख्या 100 के करीब है। यातायात नियमों की बात करें तो हर ऑटो के पीछे पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नंबर, एंबुलेंस कंट्रोल और फायर बिग्रेड के नंबर भी लिखे होने चाहिए। यह फोन नंबर भी अधिकांश ऑटो पर अंकित नहीं है। इनकी बजाय ऑटो पर राजनीतिक पार्टियों, स्कूलों और धार्मिक कार्यक्रमों का प्रचार के रूप में स्टीकर या होर्डिंग्स लगाकर चल रहे हैं।
ऑटो के पीछे पुलिस कंट्रोल, एंबुलेंस और फायर बिग्रेड के अलावा चालक का नाम और मोबाइल नंबर लिखा होना अनिवार्य है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। इस संबंध में ऑटो चालकों को निर्देश दिए जा रहे हैं। जल्द ही शहर के सभी ऑटो चालकों की बैठक लेकर उन्हें इस विषय में निर्देश भी दिए जाएंगे। - रणधीर सिंह, जिला यातायात प्रभारी, नारनौल
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दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर आदेश जारी किया था कि सभी चालक ऑटो पर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखवाएंगे। यह आदेश इसलिए जारी किए थे कि यदि किसी सवारी को ऑटो में कोई दिक्कत पेश आती है तो वह चालक के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत कर सकता है। चालकों ने इन आदेशों का पालन करने में पूरी तरह से उदासीनता बरत रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन और पुलिस ने भी इन आदेशों का पालन कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
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सुरक्षा के लिए उठाया था कदम
अक्सर अधिकारियों को शिकायत मिलती रहती है कि ऑटो चालक यात्रियों से अधिक किराया वसूलते हैं। दिन में तो अधिक किराया वसूलने से चालक गुरेज करते हैं लेकिन रात में 2 से 3 गुणा किराया वसूलते हैं। कोई विरोध करता है तो सवारी के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। सवारी अगर शिकायत करती तो उनके पास ऑटो चालक का न तो नाम होता है और न ही मोबाइल नंबर। सवारी को शिकायत करने में कोई दिक्कत न हो इसलिए चालक का नाम और मोबाइल नंबर ऑटो पर लिखवाने के आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने दिए थे।
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पुलिस कंट्रोल नंबर भी नहीं है
नारनौल शहर में ही इन ऑटों की संख्या 100 के करीब है। यातायात नियमों की बात करें तो हर ऑटो के पीछे पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नंबर, एंबुलेंस कंट्रोल और फायर बिग्रेड के नंबर भी लिखे होने चाहिए। यह फोन नंबर भी अधिकांश ऑटो पर अंकित नहीं है। इनकी बजाय ऑटो पर राजनीतिक पार्टियों, स्कूलों और धार्मिक कार्यक्रमों का प्रचार के रूप में स्टीकर या होर्डिंग्स लगाकर चल रहे हैं।
ऑटो के पीछे पुलिस कंट्रोल, एंबुलेंस और फायर बिग्रेड के अलावा चालक का नाम और मोबाइल नंबर लिखा होना अनिवार्य है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। इस संबंध में ऑटो चालकों को निर्देश दिए जा रहे हैं। जल्द ही शहर के सभी ऑटो चालकों की बैठक लेकर उन्हें इस विषय में निर्देश भी दिए जाएंगे। - रणधीर सिंह, जिला यातायात प्रभारी, नारनौल