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Mahendragarh-Narnaul News: नागरिक अस्पताल में होगा मायोपिया का उपचार, सुधरेगी दृष्टि
Fri, 14 Nov 2025 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 14 Nov 2025 11:35 PM IST
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फोटो संख्या:61- नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार---संवाद
महेंद्रगढ़। शहर स्थित नागरिक अस्पताल में सोमवार को मायोपिया उपचार शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें लोगाें व बच्चों को मायोपिया के बारे में जागरूक किया जाएगा और उपचार किया जाएगा। उपचार का समय ओपीडी के समान ही रहेगा।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि 20 नवंबर तक राष्ट्रीय मायोपिया जागरूकता सप्ताह मनाया जाएगा। इसके तहत 17 नवंबर को कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मायोपिया बच्चों में होने वाला दृष्टि दोष है। आजकल यह बच्चों में काफी बढ़ रहा है। दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों व परिजनों को इस बारे में जागरूक करना है।
निकट दृष्टि दोष आमतौर पर 6 से 14 साल की उम्र के बीच शुरू होता है और बीस की उम्र तक बदतर होता जाता है। जो बच्चे ज्यादा समय बाहर बिताते हैं, उनमें निकट दृष्टि दोष होने की संभावना कम होती है।
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शिविर में निकट दृष्टि दोष के कारणों, लक्षणों और संभावित जटिलताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। अगर बच्चों को समस्या होने पर तुरंत इलाज दिया जाए तो उनकी दृष्टि ठीक हो सकती है। शिविर का आयोजन निकट दृष्टि दोष की प्रगति को धीमा करने के लिए नियमित नेत्र परीक्षण और शीघ्र हस्तक्षेप के महत्व को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
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- ये हैं मायोपिया से बचने के उपाय
- मोबाइल, कंप्यूटर या टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें।
- बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा दें।
- हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
- पढ़ते या काम करते समय अपनी आंखों और स्क्रीन के बीच कम से कम 12-18 इंच की दूरी रखें।
- कम रोशनी में पढ़ने या काम करने से बचें और तेज रोशनी से बचें।
- सीधे बैठें और स्क्रीन या किताब को आंखों के स्तर पर रखें।
- अपनी आंखों के लिए सही प्रिस्क्रिप्शन वाला चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस पहनें।
- नियमित ब्रेक लें और दूर की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि 20 नवंबर तक राष्ट्रीय मायोपिया जागरूकता सप्ताह मनाया जाएगा। इसके तहत 17 नवंबर को कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मायोपिया बच्चों में होने वाला दृष्टि दोष है। आजकल यह बच्चों में काफी बढ़ रहा है। दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों व परिजनों को इस बारे में जागरूक करना है।
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निकट दृष्टि दोष आमतौर पर 6 से 14 साल की उम्र के बीच शुरू होता है और बीस की उम्र तक बदतर होता जाता है। जो बच्चे ज्यादा समय बाहर बिताते हैं, उनमें निकट दृष्टि दोष होने की संभावना कम होती है।
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शिविर में निकट दृष्टि दोष के कारणों, लक्षणों और संभावित जटिलताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। अगर बच्चों को समस्या होने पर तुरंत इलाज दिया जाए तो उनकी दृष्टि ठीक हो सकती है। शिविर का आयोजन निकट दृष्टि दोष की प्रगति को धीमा करने के लिए नियमित नेत्र परीक्षण और शीघ्र हस्तक्षेप के महत्व को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
- ये हैं मायोपिया से बचने के उपाय
- मोबाइल, कंप्यूटर या टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें।
- बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा दें।
- हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
- पढ़ते या काम करते समय अपनी आंखों और स्क्रीन के बीच कम से कम 12-18 इंच की दूरी रखें।
- कम रोशनी में पढ़ने या काम करने से बचें और तेज रोशनी से बचें।
- सीधे बैठें और स्क्रीन या किताब को आंखों के स्तर पर रखें।
- अपनी आंखों के लिए सही प्रिस्क्रिप्शन वाला चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस पहनें।
- नियमित ब्रेक लें और दूर की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करें।