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15 वर्ष बाद भी नहीं बना महेंद्रगढ़ का स्टेशन आदर्श

Thu, 15 Jul 2021 01:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 01:21 AM IST
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Mohindergarh railway station
महेंद्रगढ़। रेलवे स्टेशन महेंद्रगढ़ को रेलवे मंत्रालय की ओर से आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया है, लेकिन इस स्टेशन पर आदर्श कहने लायक सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। हालात यह है कि स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव निरंतर चल रहा है।
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केंद्र सरकार भले देश के यात्रियों को अच्छी सुविधा देने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। प्लेट फॉर्म नंबर दो पर पानी, शौचालय तथा टीन शेड की सुविधा तक नहीं है। विकलांगों को चढ़ने एवं उतरने के लिए रैंप नहीं है। इसके अलावा तीन साल पहले बनाया गया स्टेशन भवन का पलस्तर भी उतरने लगा है।
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बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन को 2006 में आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया था। आदर्श स्टेशन का दर्जा कागजों में ही चलता रहा, लेकिन यात्रियों के लिए सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई। 2008 में रेलवे स्टेशन पर एक दो भवनों का निर्माण जरूर हुआ। लेकिन सुविधाएं फिर भी नदारद रही। 2018 में लगभग 30 लाख रुपये से रेलवे का नया भवन, वेटिंग हॉल, शौचालय आदि बनाए गए थे।
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नए भवन का उतरने लगा पलस्तर
करीब साढ़े तीन साल पहले 24 जनवरी 2018 को जयपुर मंडल के जीएम टीपी सिंह ने नए भवन का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के एक वर्ष बाद ही भवन का पलस्तर उतरने लग गया था। निर्माण के दौरान यहां के लोगों ने इसमें घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने का मुद्दा भी उठाया था और रेलवे अधिकारियों को शिकायत भी दी थी। बावजूद इसके रेलवे अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप घटिया सामग्री लगाने की वजह से एक वर्ष बाद ही दीवारों से पलस्तर उतरने लगा था। वहीं शौचालय में भी दरारें आ गईं।
लॉकडाउन से पहले करते थे 1500 यात्री प्रतिदिन सफर
बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन से लॉकडाउन से पहले लगभग 32 गाड़ियां प्रतिदिन गुजरतीं थी। सभी एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव इस स्टेशन पर होता था। स्टेशन से प्रतिदिन 1500 यात्री यात्रा करते थे। इससे रेलवे को लगभग सवा लाख रुपये प्रतिदिन राजस्व प्राप्त होता था। बावजूद इसके यात्रियों को पूरी सुविधा नहीं दी जा रही। अभी आठ से दस गाड़ियां ही चल रही हैं।
पूरे स्टेशन पर एक आरओ से चलता है काम
बता दें कि इस भीषण गर्मी में रेलवे स्टेशन पर मात्र एक आरओ से काम चलाया जा रहा है। यह आरओ भी प्लेट फॉर्म नंबर 1 पर एक संस्था की ओर से लगाया गया था। प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर आरओ तो दूर वहां लगे नलों में भी पानी नहीं आ रहा। अगर यात्रियों को पानी पीना हो तो पुल पार कर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आए। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक जो वाटर कूलर लगाया हुआ है, फिलहाल वो भी खराब पड़ा है।
प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर नहीं है कोई सुविधा :
बता दें कि प्लेट फॉर्म नंबर दो यात्रियों के ट्रेन में चढ़ने एवं उतरने के लिए ही बनाया गया है। इसके अलावा इस प्लेट फॉर्म पर कोई सुविधा नहीं है। इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर शौचालय तक की सुविधा नहीं है और न ही पानी की सुविधा। यात्रियों के लिए बैठने के लिए कुर्सियां तो है, लेकिन बारिश और धूप से बचाव के लिए टीन शेड नहीं हैं। रेलवे ने कुर्सियों के ऊपर छोटे-छोटे टीन शेड तो लगाए हैं, लेकिन बारिश और धूप में उनसे बचाव नहीं हो पाता।
महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन नाम का आदर्श रेलवे स्टेशन है लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। प्लेटफार्म नंबर दो पर पानी की सुविधा नहीं है। लगभग आठ से दस नल बूथ बनाए गए हैं। एक पर भी पानी नहीं है।
-राकेश दहिया
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 पर शौचालय नहीं हैं। अगर किसी को शौच की दिक्कत हो जाए तो पुल पार कर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर जाना पड़ता है। इससे यात्रियों को खासतौर से महिलाओं और बुजुर्गों को बहुत परेशानी होती है।

-रिषीपाल
प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर टीन शेड नहीं हैं। यात्रियों के बैठने के लिए जगह नहीं है। जगह-जगह छोटी टीन शेड लगी हैं। उसमें से एक या दो टीन शेड टूटी पड़ी है। बारिश में यात्री यहां खड़ा ही नहीं रह सकता।
-बागवीर
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