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कर्म करते हुए भी मनुष्य अपना कल्याण कर सकता है: स्वामी ज्ञानानंद
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नारनौल। घर परिवार छोड़ कर एकांत स्थान पर भक्ति करने से कल्याण होगा ऐसा सोचना गलत है। मनुष्य अपना कर्म करते हुए भी अपना कल्याण कर सकता है। यह कथन श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता समिति द्वारा अग्रवाल सभा में चल रहे गीता सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने प्रवचन देते हुए कही।
स्वामी ने लोग सोचते होंगे की यदि कर्म करते हुए कल्याण हो जाए तो तीर्थों व मंदिरों का क्या लाभ इसका उदाहरण देते हुए कहा कि तीर्थ व मंदिर में जाने से व्यवहार व वातावरण में परिवर्तन होता है। यह ठीक उसी प्रकार होता है जैसे बच्चे स्कूल व कॉलेज जाते है और पढ़ाई का माहौल बनता है। जैसे स्कूल में जाकर व्यवहार व वातावरण में परिवर्तन होता है ठीक उसी प्रकार तीर्थ व मंदिर में जाकर भी व्यवहार में परिवर्तन होता है और भक्ति करने की शक्ति उत्पन्न होती है। भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए स्वामी ने कहा कि वह ऐसा भक्त था जिसने विपरीत परिस्थिति व विपदा आने पर भी प्रभु नाम नहीं छोड़ा और प्रभु को आना पड़ा।
स्वामी ने कहा कि कई बार कुछ लोग अहंकार में पूछते है कि कहां है भगवान, लेकिन हम फिर भी कहते है कि कहां नहीं है। स्वामी ने बताया कि कोविड ने बड़ों-बड़ों को हिला दिया। इसमें व्यापारी बच्चे सब घर में बैठे-बैठे अपने नुकसान की चिंता में दिमागी रूप से परेशान होने लगे। ऐसे में हमने गीता पाठ अध्ययन करने की प्रेरणा दी जो दृढ़ता सिखाती है। गीता सबके लिए है यदि चित को खोलकर अध्ययन करो तो यह मुक्ति के लिए सरल है। स्वामी ने मोड़ावाला मंदिर में त्रिवेणी लगाई। कथा में संरक्षक डॉ. अशोक आहुजा, प्रधान घनश्याम गर्ग, चौधरी प्रभातीलाल, समाजसेवी सुरेश सैनी, बेगराज गोयल, मुकेश अग्रवाल, रोहताश अग्रवाल, रामनाराण चौधरी, हरिओम गर्ग, ग्यारसीलाल चौधरी, राजेश गोयल, पवन गर्ग, ओमप्रकाश आरोड़ा, धर्मचंद छाबड़ा तथा राजेंद्र तनेजा मौजूद रहे।
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स्वामी ने लोग सोचते होंगे की यदि कर्म करते हुए कल्याण हो जाए तो तीर्थों व मंदिरों का क्या लाभ इसका उदाहरण देते हुए कहा कि तीर्थ व मंदिर में जाने से व्यवहार व वातावरण में परिवर्तन होता है। यह ठीक उसी प्रकार होता है जैसे बच्चे स्कूल व कॉलेज जाते है और पढ़ाई का माहौल बनता है। जैसे स्कूल में जाकर व्यवहार व वातावरण में परिवर्तन होता है ठीक उसी प्रकार तीर्थ व मंदिर में जाकर भी व्यवहार में परिवर्तन होता है और भक्ति करने की शक्ति उत्पन्न होती है। भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए स्वामी ने कहा कि वह ऐसा भक्त था जिसने विपरीत परिस्थिति व विपदा आने पर भी प्रभु नाम नहीं छोड़ा और प्रभु को आना पड़ा।
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स्वामी ने कहा कि कई बार कुछ लोग अहंकार में पूछते है कि कहां है भगवान, लेकिन हम फिर भी कहते है कि कहां नहीं है। स्वामी ने बताया कि कोविड ने बड़ों-बड़ों को हिला दिया। इसमें व्यापारी बच्चे सब घर में बैठे-बैठे अपने नुकसान की चिंता में दिमागी रूप से परेशान होने लगे। ऐसे में हमने गीता पाठ अध्ययन करने की प्रेरणा दी जो दृढ़ता सिखाती है। गीता सबके लिए है यदि चित को खोलकर अध्ययन करो तो यह मुक्ति के लिए सरल है। स्वामी ने मोड़ावाला मंदिर में त्रिवेणी लगाई। कथा में संरक्षक डॉ. अशोक आहुजा, प्रधान घनश्याम गर्ग, चौधरी प्रभातीलाल, समाजसेवी सुरेश सैनी, बेगराज गोयल, मुकेश अग्रवाल, रोहताश अग्रवाल, रामनाराण चौधरी, हरिओम गर्ग, ग्यारसीलाल चौधरी, राजेश गोयल, पवन गर्ग, ओमप्रकाश आरोड़ा, धर्मचंद छाबड़ा तथा राजेंद्र तनेजा मौजूद रहे।
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