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Mahendragarh-Narnaul News: भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर इंद्र का अभिमान किया दूर
Tue, 03 Sep 2024 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 03 Sep 2024 11:59 PM IST
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फोटो- 07भागवत कथा के दौरान झूमते श्रद्धालु। स्त्रोत- संस्था
नारनौल। शहर के नजदीकी गांव डोहर खुर्द में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान से पूजन करवाया। इसके बाद भागवत कथा का शुभारंभ किया।
आचार्य बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा का प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन को उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया। इंद्र ने बृज में आकर भगवान से क्षमा मांगी और भगवान कृष्ण ने इंद्र को क्षमा कर दिया। भगवान कृष्ण ने कहा इंद्र अगर मेरा अपमान करता है उसे मैं सहन कर लू। लेकिन जो भी मेरे भक्तो, संतों को कष्ट देता है उसे मैं कभी सहन नही कर सकता। भगवान कृष्ण कहते है कि मेरा अवतार संतों भक्तो की रक्षा और दुष्टों राक्षसों के संहार के लिए हुआ है। आचार्य ने बताया कि गोपियां कोई साधारण स्त्रियां नही है, पूर्व जन्म के बडे़ बडे़ ऋषि मुनि संत महात्मा ही बृज में गोपी बनकर आए हैं। उनका भगवान कृष्ण को पाना ही जीवन का परम उद्देश्य है। आचार्य ने बताया कि जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया और हर बार पराजित होकर गया। वहीं 18वीं बार जरासंध ने 11000 ब्राह्मणों को पाठ पर बिठाया और अपने सेनापति से कहा कि यदि इस बार मेरी हार हो जाए तो इन ब्राह्मणों को मौत के घाट उतार देना तो भगवान अपने भक्तो की रक्षा के लिए युद्ध को बीच में छोड़कर चले गए। कथा के अंत में भगवान श्री कृष्ण और विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि के विवाह का वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य यजमान भोलाराम शर्मा, रतनलाल शर्मा, अशोक शर्मा, विकास शर्मा, लीलावती देवी मौजूद रहीं।
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आचार्य बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा का प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन को उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया। इंद्र ने बृज में आकर भगवान से क्षमा मांगी और भगवान कृष्ण ने इंद्र को क्षमा कर दिया। भगवान कृष्ण ने कहा इंद्र अगर मेरा अपमान करता है उसे मैं सहन कर लू। लेकिन जो भी मेरे भक्तो, संतों को कष्ट देता है उसे मैं कभी सहन नही कर सकता। भगवान कृष्ण कहते है कि मेरा अवतार संतों भक्तो की रक्षा और दुष्टों राक्षसों के संहार के लिए हुआ है। आचार्य ने बताया कि गोपियां कोई साधारण स्त्रियां नही है, पूर्व जन्म के बडे़ बडे़ ऋषि मुनि संत महात्मा ही बृज में गोपी बनकर आए हैं। उनका भगवान कृष्ण को पाना ही जीवन का परम उद्देश्य है। आचार्य ने बताया कि जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया और हर बार पराजित होकर गया। वहीं 18वीं बार जरासंध ने 11000 ब्राह्मणों को पाठ पर बिठाया और अपने सेनापति से कहा कि यदि इस बार मेरी हार हो जाए तो इन ब्राह्मणों को मौत के घाट उतार देना तो भगवान अपने भक्तो की रक्षा के लिए युद्ध को बीच में छोड़कर चले गए। कथा के अंत में भगवान श्री कृष्ण और विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि के विवाह का वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य यजमान भोलाराम शर्मा, रतनलाल शर्मा, अशोक शर्मा, विकास शर्मा, लीलावती देवी मौजूद रहीं।
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