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अंधविश्वास नहीं, तर्क से हो सत्य की खोज :
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फोटो 9आध्यात्मिक संवाद कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोग।स्रोत:प्रवक्ता
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नारनौल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शहर में ‘आध्यात्मिक संवाद’ की शुरुआत की गई। सुभाष पार्क में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन, सृष्टि और मानव अस्तित्व से जुड़े मूलभूत सवालों पर खुले मन से चर्चा करना है। डॉ. यादव सुबेसिंह ने कहा कि अंधविश्वास नहीं, तर्क से हो सत्य की खोज हो सकती है।
डॉ. यादव ने कहा कि सृष्टिकर्ता चाहता है कि मनुष्य का जीवन आनंद से भरा हो। सृष्टि के निर्माण का उद्देश्य भी आनंद का विस्तार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मनुष्य की सबसे बड़ी चाहत स्थायी आनंद है, तो उसे यह आनंद लगातार क्यों नहीं मिल पाता। ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए संवाद की पहल की गई है।
कार्यक्रम में संविधान विशेषज्ञ डॉ. एसपी यादव, समाजसेवी सुरेशचंद्र संघी, बाबूलाल यादव, रोड सेफ्टी संस्थान के राजेश यादव और सेवानिवृत्त जेई भगवत सैनी समेत कई चिंतक शामिल हुए। सभी ने इसे स्वस्थ चिंतन और जनहित के लिए उपयोगी पहल बताया।
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डॉ. सुबेसिंह ने क्षेत्र के विद्वानों से सप्ताह में एक दिन बैठक कर इन सवालों पर चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जवाब वैज्ञानिक, तार्किक, व्यावहारिक और शास्त्रसम्मत होने चाहिए तथा सत्य की खोज पूर्वाग्रह और अंधविश्वास से मुक्त रहनी चाहिए।
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डॉ. यादव ने कहा कि सृष्टिकर्ता चाहता है कि मनुष्य का जीवन आनंद से भरा हो। सृष्टि के निर्माण का उद्देश्य भी आनंद का विस्तार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मनुष्य की सबसे बड़ी चाहत स्थायी आनंद है, तो उसे यह आनंद लगातार क्यों नहीं मिल पाता। ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए संवाद की पहल की गई है।
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कार्यक्रम में संविधान विशेषज्ञ डॉ. एसपी यादव, समाजसेवी सुरेशचंद्र संघी, बाबूलाल यादव, रोड सेफ्टी संस्थान के राजेश यादव और सेवानिवृत्त जेई भगवत सैनी समेत कई चिंतक शामिल हुए। सभी ने इसे स्वस्थ चिंतन और जनहित के लिए उपयोगी पहल बताया।
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डॉ. सुबेसिंह ने क्षेत्र के विद्वानों से सप्ताह में एक दिन बैठक कर इन सवालों पर चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जवाब वैज्ञानिक, तार्किक, व्यावहारिक और शास्त्रसम्मत होने चाहिए तथा सत्य की खोज पूर्वाग्रह और अंधविश्वास से मुक्त रहनी चाहिए।