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Mahendragarh-Narnaul News: बिहाली के खेतों में दिखे तेंदुए के पैरों के निशान, ग्रामीणों में दहशत
Mon, 26 Aug 2024 12:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 26 Aug 2024 12:20 PM IST
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फोटो- 15ग्रामीणों द्वारा ली गई तेंदुए के पदचिन्हों की फोटो।
मंडी अटेली (नारनौल)। अटेली के गांव बिहाली की बनी के समीप खेतों में तेंदुए के पैरों के निशान दिखने से गांव में दहशत फैल गई है। इसको लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए को लेकर चर्चा होती रही।
शनिवार को गांव बिहाली निवासी किसान अशोक कुमार जब बनी के साथ लगते अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाकर आया तो किसी जानवर के अजीब से पद चिह्न को देखकर वह दंग रह गया। अशोक का कहना है कि ये तेंदुए के पैरों के निशान हैं, जो कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। उसने पैरों के निशान की फोटो खींचकर गांव के लोगों को बताया। कुछ समय पहले सरिस्का से निकले टाइगर की गांव झाबुआ की बनी में होने की चर्चा से अटेली व राजस्थान सीमा से सटे ग्रामीण दहशत में हैं। रेवाड़ी-अटेली वन क्षेत्र की सीमा राजस्थान की सीमा से सटी हुई है। लगभग 100 किलोमीटर का पहाड़ी व वन क्षेत्र है, जिसमें नीलगाय व गीदड़ आदि कई जीव जंतु रहते हैं।
तेंदुए की सूचना अभी हमारे संज्ञान में नहीं आई है, वहीं सरिस्का टाइगर की चर्चा बावल क्षेत्र में है। इन पंजों के निशान देखने पर ये तेंदुए के पंजों के निशान नही लगते फिर भी गंभीरता से जांच पड़ताल की जाएगी। ताकि कहीं किसी प्रकार का कोई जंगली जानवर किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
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-चरण सिंह, वन्य जीव अधिकारी नारनौल।
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शनिवार को गांव बिहाली निवासी किसान अशोक कुमार जब बनी के साथ लगते अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाकर आया तो किसी जानवर के अजीब से पद चिह्न को देखकर वह दंग रह गया। अशोक का कहना है कि ये तेंदुए के पैरों के निशान हैं, जो कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। उसने पैरों के निशान की फोटो खींचकर गांव के लोगों को बताया। कुछ समय पहले सरिस्का से निकले टाइगर की गांव झाबुआ की बनी में होने की चर्चा से अटेली व राजस्थान सीमा से सटे ग्रामीण दहशत में हैं। रेवाड़ी-अटेली वन क्षेत्र की सीमा राजस्थान की सीमा से सटी हुई है। लगभग 100 किलोमीटर का पहाड़ी व वन क्षेत्र है, जिसमें नीलगाय व गीदड़ आदि कई जीव जंतु रहते हैं।
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तेंदुए की सूचना अभी हमारे संज्ञान में नहीं आई है, वहीं सरिस्का टाइगर की चर्चा बावल क्षेत्र में है। इन पंजों के निशान देखने पर ये तेंदुए के पंजों के निशान नही लगते फिर भी गंभीरता से जांच पड़ताल की जाएगी। ताकि कहीं किसी प्रकार का कोई जंगली जानवर किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
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-चरण सिंह, वन्य जीव अधिकारी नारनौल।