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कृष्ण-सुदामा ने निभाई सच्ची मित्रता : आचार्य निमेश जोशी
Wed, 26 Jun 2024 03:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 26 Jun 2024 03:34 AM IST
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फोटो संख्या: 71 कनीना में कथा का रसपान करवाते हुए अचार्य निमेश के जोशी---संवाद
कनीना। अटेली रोड पर निर्माणाधीन रेलवे पुल के नजदीक स्थित भारद्वाज कैनाल फार्म हाउस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को जप व कथा वाचन के साथ समापन किया गया।
आचार्य निमेश के जोशी के नेतृत्व में विप्रमंडल ने अनुष्ठान के मुख्य यजमान जिला न्यायाधीश रूपेश शर्मा से जीव कल्याण के लिए देव पूजा संपन्न कराई। कथा के अंतिम दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आख्यान कहना व सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए।
उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र सखा से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है।अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। इस मौके पर केदारमल, नंदकिशोर शर्मा, राधेश्याम शर्मा, बजरंग लाल शर्मा, महेंद्र सिंह, योगेश तिवारी, नरेश शास्त्री, राजवीर सिंह, संतोष, शीला, सुधा, संतरा देवी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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आचार्य निमेश के जोशी के नेतृत्व में विप्रमंडल ने अनुष्ठान के मुख्य यजमान जिला न्यायाधीश रूपेश शर्मा से जीव कल्याण के लिए देव पूजा संपन्न कराई। कथा के अंतिम दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आख्यान कहना व सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए।
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उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र सखा से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है।अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। इस मौके पर केदारमल, नंदकिशोर शर्मा, राधेश्याम शर्मा, बजरंग लाल शर्मा, महेंद्र सिंह, योगेश तिवारी, नरेश शास्त्री, राजवीर सिंह, संतोष, शीला, सुधा, संतरा देवी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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