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Mahendragarh-Narnaul News: कारगिल के हीरो...22 की उम्र में शहादत का जश्न....मुझे मेरे पति पर गर्व
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फोटो 17शहीद रामसिंह की गांव में लगी प्रतिमा। संवाद
जितेंद्र सोलंकी
मंडी अटेली (नारनाैल)। पति की उम्र 22 साल थी। देशभक्ति का जज्बा उनमें भरा हुआ था। युद्ध के समय तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर आया था...वह शहादत का जश्न था। राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राणों की कुर्बानी देना किसी भी व्यक्ति के लिए गौरव की बात होती है। मुझे मेरे पति की शहादत पर गर्व है। अब उनकी शहादत युवाओं को देश की रक्षा के लिए प्रेरित कर रही है। ये बातें रामपुरा गांव के कारगिल योद्धा राम सिंह की पत्नी तारावती ने जोशीले स्वर में कहीं।
गांव रामपुरा निवासी सेना में हवलदार रामसिंह कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान शहीद हुए थे। शहीद रामसिंह 11 कुमायूं रेजिमेंट में हवलदार पद पर तैनात थे, तब उनकी उम्र 22 वर्ष ही थी। शहीद रामसिंह की पत्नी तारावती ने कहा कि जब पति का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा आया था, तब बेटा भूदेव 3 साल का था। परिवार के लिए वह समय बहुत ही कठिन था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अपने बेटे का पालन-पोषण किया। आज बेटा पढ़-लिखकर अपने कार्य में व्यस्त है। उसकी रगों में भी एक जांबाज सैनिक का रक्त है। तारावती ने कहा कि शहीद परिवारों को सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करेगी और उन्हें उचित सम्मान और सहायता प्रदान करेगी। बेटे भूदेव ने बताया कि पिता की शहादत की कहानियां सुनकर बड़ा हुआ हूं। मेरे अंदर भी देशभक्ति और सेवा की भावना का जोश भरा हुआ है। यदि मुझे सेना में सेवा का अवसर मिले तो मैं भी पिता की तरह जांबाजी और शाैर्य की नई गाथा लिखूंगा।
6 जून को हुए थे शहीद, 10 को पहुंचा था गांव में पार्थिव शरीर
शहीद रामसिंह 11 कुमायूं रेजिमेंट में हवलदार पद पर तैनात थे। पाकिस्तान ने जब कारगिल हिल पर कब्जा किया तो उन्होंने अपने साथियों के साथ दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया लेकिन वह दुश्मनों से लड़ते हुए 6 जून 1999 को वीरगति को प्राप्त हो गए। 10 जून को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा पैतृक गांव रामपुरा में लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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शहीद परिवारों को मिली थी गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप, उन्हें अब तक नहीं मिले
शहीद की पत्नी तारावती ने कहा कि सरकार की ओर से शहीद परिवारों को सम्मान स्वरूप गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप इत्यादि की सुविधा देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन उनके परिवार को अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। अब उनका बेटा बड़ा हो गया है, इसलिए सरकार को सरकारी नौकरी या कुछ व्यवसाय से संबंधित सहायता करनी चाहिए। तारावती ने सरकार से आग्रह किया कि वह शहीद परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से ले।
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मंडी अटेली (नारनाैल)। पति की उम्र 22 साल थी। देशभक्ति का जज्बा उनमें भरा हुआ था। युद्ध के समय तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर आया था...वह शहादत का जश्न था। राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राणों की कुर्बानी देना किसी भी व्यक्ति के लिए गौरव की बात होती है। मुझे मेरे पति की शहादत पर गर्व है। अब उनकी शहादत युवाओं को देश की रक्षा के लिए प्रेरित कर रही है। ये बातें रामपुरा गांव के कारगिल योद्धा राम सिंह की पत्नी तारावती ने जोशीले स्वर में कहीं।
गांव रामपुरा निवासी सेना में हवलदार रामसिंह कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान शहीद हुए थे। शहीद रामसिंह 11 कुमायूं रेजिमेंट में हवलदार पद पर तैनात थे, तब उनकी उम्र 22 वर्ष ही थी। शहीद रामसिंह की पत्नी तारावती ने कहा कि जब पति का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा आया था, तब बेटा भूदेव 3 साल का था। परिवार के लिए वह समय बहुत ही कठिन था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अपने बेटे का पालन-पोषण किया। आज बेटा पढ़-लिखकर अपने कार्य में व्यस्त है। उसकी रगों में भी एक जांबाज सैनिक का रक्त है। तारावती ने कहा कि शहीद परिवारों को सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करेगी और उन्हें उचित सम्मान और सहायता प्रदान करेगी। बेटे भूदेव ने बताया कि पिता की शहादत की कहानियां सुनकर बड़ा हुआ हूं। मेरे अंदर भी देशभक्ति और सेवा की भावना का जोश भरा हुआ है। यदि मुझे सेना में सेवा का अवसर मिले तो मैं भी पिता की तरह जांबाजी और शाैर्य की नई गाथा लिखूंगा।
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6 जून को हुए थे शहीद, 10 को पहुंचा था गांव में पार्थिव शरीर
शहीद रामसिंह 11 कुमायूं रेजिमेंट में हवलदार पद पर तैनात थे। पाकिस्तान ने जब कारगिल हिल पर कब्जा किया तो उन्होंने अपने साथियों के साथ दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया लेकिन वह दुश्मनों से लड़ते हुए 6 जून 1999 को वीरगति को प्राप्त हो गए। 10 जून को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा पैतृक गांव रामपुरा में लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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शहीद परिवारों को मिली थी गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप, उन्हें अब तक नहीं मिले
शहीद की पत्नी तारावती ने कहा कि सरकार की ओर से शहीद परिवारों को सम्मान स्वरूप गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप इत्यादि की सुविधा देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन उनके परिवार को अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। अब उनका बेटा बड़ा हो गया है, इसलिए सरकार को सरकारी नौकरी या कुछ व्यवसाय से संबंधित सहायता करनी चाहिए। तारावती ने सरकार से आग्रह किया कि वह शहीद परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से ले।