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कबाड़ में बेची गई विदेशी दूतावास की गाड़ी ने मारी थी आईटीबीपी जवान को टक्कर
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तीन सितंबर को उन्हानी टी-प्वांइट पर हुए सड़क दुर्घटना में एक बंग्लादेश दूतावास की गाड़ी ने बाइक सवार आइटीबीपी जवान को टक्कर मार दी थी। गाड़ी चालक तथा उस में सवार अन्य लोग मौके से भाग निकले थे। पुलिस इस गाड़ी की तह तक नहीं पहुंच पाई है।
इस दुर्घटना के चलते वीरवार को बांग्लादेश दूतावास से उल्लास दत्ता व राज प्रोटोकॉल ऑफिसर बांग्लादेश, नई दिल्ली से कनीना थाने में आए। उनसे पुलिस ने दूतावास की गाड़ी के बारे में पूछताछ की और घायल आईटीबीपी के जवान मरीज का हालचाल जाना। एएसआई कुलदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि गाड़ी की मालिक अशरद खान जो बांग्लादेश की रहने वाली है। नई दिल्ली भारत में राजदूत का कार्य करती थी। वो 30 जुलाई को अपनी दूतावास की गाड़ी को निजी चालक प्रकाश के हाथों कबाड़ में बेचकर शपथ पत्र पर लिखवाकर 30 जुलाई को बंग्लादेश चली गई थी। दूतावास उल्लास दत्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि अरशद खान अपना शपथ पत्र अपने निजी चालक प्रकाश को गाड़ी कबाड़ी को कटवाने के लिए देकर चली गई थी। उसके बाद प्रकाश को दिल का दौरा आने के वजह से बीमार हो गया था और वह अस्पताल में भर्ती हो गया था। जब प्रकाश से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि वह गाड़ी त्रिभुवन मुखर्जी नामक कबाड़ी को बेच दी थी तथा कोरोना के चलते मायापुरी दिल्ली बंद होने से उन्होंने इसे बोर्डर पर ले जाकर स्क्रैप करवाने की बात कही थी। प्रकाश ने बताया कि दूतावास की गाड़ी की चेसिस व नंबर प्लेट दूतावास भिजवाने का आदेश भी दिया था। जब त्रिभुवन मुखर्जी से संपर्क साधा तो फोन पर जानकारी दी कि मेरे से पृथ्वी नाम करके एक व्यक्ति जो कि दुर्घटना स्थल के आसपास एरिया का ही रहने वाला है, लेकर गया था। उन्होंने आगे कहा कि पृथ्वी ने मुझे बताया था कि वह अपने एरिया के आसपास स्क्रैप का कार्य करता है। त्रिभुवन ने यह भी बताया कि पृथ्वी से मैंने एफिडेविट पर या लिखवा लिया था कि यह गाड़ी चला कर नहीं लेकर जाएगा।
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इस दुर्घटना के चलते वीरवार को बांग्लादेश दूतावास से उल्लास दत्ता व राज प्रोटोकॉल ऑफिसर बांग्लादेश, नई दिल्ली से कनीना थाने में आए। उनसे पुलिस ने दूतावास की गाड़ी के बारे में पूछताछ की और घायल आईटीबीपी के जवान मरीज का हालचाल जाना। एएसआई कुलदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि गाड़ी की मालिक अशरद खान जो बांग्लादेश की रहने वाली है। नई दिल्ली भारत में राजदूत का कार्य करती थी। वो 30 जुलाई को अपनी दूतावास की गाड़ी को निजी चालक प्रकाश के हाथों कबाड़ में बेचकर शपथ पत्र पर लिखवाकर 30 जुलाई को बंग्लादेश चली गई थी। दूतावास उल्लास दत्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि अरशद खान अपना शपथ पत्र अपने निजी चालक प्रकाश को गाड़ी कबाड़ी को कटवाने के लिए देकर चली गई थी। उसके बाद प्रकाश को दिल का दौरा आने के वजह से बीमार हो गया था और वह अस्पताल में भर्ती हो गया था। जब प्रकाश से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि वह गाड़ी त्रिभुवन मुखर्जी नामक कबाड़ी को बेच दी थी तथा कोरोना के चलते मायापुरी दिल्ली बंद होने से उन्होंने इसे बोर्डर पर ले जाकर स्क्रैप करवाने की बात कही थी। प्रकाश ने बताया कि दूतावास की गाड़ी की चेसिस व नंबर प्लेट दूतावास भिजवाने का आदेश भी दिया था। जब त्रिभुवन मुखर्जी से संपर्क साधा तो फोन पर जानकारी दी कि मेरे से पृथ्वी नाम करके एक व्यक्ति जो कि दुर्घटना स्थल के आसपास एरिया का ही रहने वाला है, लेकर गया था। उन्होंने आगे कहा कि पृथ्वी ने मुझे बताया था कि वह अपने एरिया के आसपास स्क्रैप का कार्य करता है। त्रिभुवन ने यह भी बताया कि पृथ्वी से मैंने एफिडेविट पर या लिखवा लिया था कि यह गाड़ी चला कर नहीं लेकर जाएगा।
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