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तीन साल से स्कीन और चार साल से ईएनटी का डॉक्टर नहीं
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नागरिक अस्पताल नारनौल में ओपीडी में लगी भीड़।
- फोटो : Narnol
जिला नागरिक अस्पताल में करीब तीन साल से स्कीन और चार साल से ईएनटी का डॉक्टर नहीं हैं। इससे मरीजों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों के न होने से ऐसे मरीजों का उपचार जनरल ओपीडी में होता है।
बता दें कि जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब ओपीडी करीब 900 से 1200 के बीच में रहती है। अस्पताल में अन्य बीमारियों के डॉक्टर उपलब्ध हैं। लेकिन, अस्पताल में स्कीन का डॉक्टर जून 2016 से नहीं है। पहले डॉ. अपार जिला अस्पताल में स्कीन विशेषज्ञ के रुप में कार्यरत थे। उनके जाने के बाद दोबारा स्कीन डॉक्टर की अस्पताल में तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में इस बीमारी के गंभीर मरीजों का जिला अस्पताल में उपचार नहीं हो पा रहा है। उन्हें निजी अस्पतालों की सेवाएं लेनी पड़ रही है। दूसरी ओर आंख, कान व नाक (ईएनटी) साल 2015 से नहीं है। डॉ. कामराज के जाने के बाद दोबारा कोई डॉक्टर नहीं आया। ऐसे में ईएनटी के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में सभी रोगों के विशेषज्ञ होने चाहिए। जिससे की लोगों को बेहतर हेल्थ सेवाएं मिल सके। दोनों बीमारियों के रोजाना करीब 50 मरीज आ जाते हैं।
- कान में परेशानी को लेकर जिला अस्पताल आया था। ईएनटी डॉक्टर न होने जनरल ओपीडी में दिखाना पड़ा। सरकार को जिला स्तर पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का इंतजाम करना चाहिए।
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- प्रदीप
नाक की बीमारी दिखाने अस्पताल आया था। लेकिन, जनरल ओपीडी के डॉक्टर ने दवा देने के बाद किसी स्पेशलिस्ट से दिखाने की सलाह दी। ईएनटी के डॉक्टर अस्पताल में कम से कम एक तो जरुर होना चाहिए।
- अंकित
अस्पताल में ईएनटी व स्कीन के स्पेशलिस्ट नहीं हैं। इस बीमारी के मरीजों को जनरल ओपीडी में देखने के इंतजाम है। - डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी एमएस, जीएच नारनौल
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बता दें कि जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब ओपीडी करीब 900 से 1200 के बीच में रहती है। अस्पताल में अन्य बीमारियों के डॉक्टर उपलब्ध हैं। लेकिन, अस्पताल में स्कीन का डॉक्टर जून 2016 से नहीं है। पहले डॉ. अपार जिला अस्पताल में स्कीन विशेषज्ञ के रुप में कार्यरत थे। उनके जाने के बाद दोबारा स्कीन डॉक्टर की अस्पताल में तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में इस बीमारी के गंभीर मरीजों का जिला अस्पताल में उपचार नहीं हो पा रहा है। उन्हें निजी अस्पतालों की सेवाएं लेनी पड़ रही है। दूसरी ओर आंख, कान व नाक (ईएनटी) साल 2015 से नहीं है। डॉ. कामराज के जाने के बाद दोबारा कोई डॉक्टर नहीं आया। ऐसे में ईएनटी के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में सभी रोगों के विशेषज्ञ होने चाहिए। जिससे की लोगों को बेहतर हेल्थ सेवाएं मिल सके। दोनों बीमारियों के रोजाना करीब 50 मरीज आ जाते हैं।
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- कान में परेशानी को लेकर जिला अस्पताल आया था। ईएनटी डॉक्टर न होने जनरल ओपीडी में दिखाना पड़ा। सरकार को जिला स्तर पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का इंतजाम करना चाहिए।
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- प्रदीप
नाक की बीमारी दिखाने अस्पताल आया था। लेकिन, जनरल ओपीडी के डॉक्टर ने दवा देने के बाद किसी स्पेशलिस्ट से दिखाने की सलाह दी। ईएनटी के डॉक्टर अस्पताल में कम से कम एक तो जरुर होना चाहिए।
- अंकित
अस्पताल में ईएनटी व स्कीन के स्पेशलिस्ट नहीं हैं। इस बीमारी के मरीजों को जनरल ओपीडी में देखने के इंतजाम है। - डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी एमएस, जीएच नारनौल