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प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शैक्षिक प्रणालियों के साथ एकीकृत करना आवश्यक : यादव

Sat, 27 Jul 2024 11:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 27 Jul 2024 11:12 PM IST
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It is necessary to integrate ancient knowledge with modern educational systems: Yadav
फोटो संख्या:51- क्षमता निर्माण कार्यक्रम में प्रतिभागी हकेंवि समकुलपति प्रो. सुषमा यादव व अन्य
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के वाणिज्य विभाग की ओर से शनिवार को क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के 30 से अधिक संकाय सदस्य और शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की समृद्ध विरासत और समकालीन शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
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हकेंवि की समकुलपति एवं कार्यक्रम की संरक्षक प्रो. सुषमा यादव, विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी प्रो. विकास कुमार तथा चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के प्रो. एस.के सिन्हा की ओर से व्याख्यान दिए गए। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने आयोजन के लिए वाणिज्य विभाग की पहल की सराहना की।
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प्रो. सुषमा यादव ने समग्र और समावेशी शिक्षण वातावरण विकसित करने के लिए प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शैक्षिक प्रणालियों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बोलते हुए प्रो. यादव ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। उन्होंने प्रतिभागियों के सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।
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प्रो. एस.के. सिन्हा ने शोध पद्धति पर शैक्षणिक अनुसंधान करने के लिए आवश्यक व्यवस्थित प्रक्रियाओं और तकनीकों पर केंद्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शोध कौशल को बढ़ाने में सहयोग किया। हकेंवि के वित्त अधिकारी प्रो. विकास कुमार ने जर्नल प्रकाशन पर केंद्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशन के बारे में व्यापक दिशा-निर्देशों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने लेखकों के लिए सामान्य निर्देश, सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया और शोध प्रकाशन में नैतिक विचारों जैसे प्रमुख पहलुओं को संबोधित किया। प्रतिभागियों के साथ एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में भी भाग लिया, उनके शोध योगदान पर चर्चा की और उनकी प्रकाशन रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए व्यक्तिगत सलाह प्रदान की।


आयोजन में वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीना कार्यक्रम के निदेशक तथा डॉ. दिव्या ने सह-निदेशक की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों की भारतीय ज्ञान प्रणाली की समझ और वर्तमान शैक्षिक व्यवस्था में इसके अनुप्रयोग को बढ़ावा देना था।
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