{"_id":"6aa5980e8daac45ba903044c","slug":"in-a-second-case-detention-led-to-absence-the-accused-was-granted-bail-again-narnol-news-c-196-1-nnl1010-145200-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: दूसरे केस में हिरासत बनी गैरहाजिरी की वजह, आरोपी को फिर मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: दूसरे केस में हिरासत बनी गैरहाजिरी की वजह, आरोपी को फिर मिली जमानत
विज्ञापन
नारनौल। अपर सत्र न्यायाधीश नितिन राज की अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के मामले में आरोपी कमलदीप उर्फ ढोलिया को दोबारा जमानत देने के आदेश जारी किए हैं। आरोपी को एक लाख रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि का एक जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा किया जाएगा। मामला थाना सतनाली में दर्ज है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी को इससे पहले 30 जनवरी 2024 को जमानत मिल चुकी थी। 11 सितंबर 2025 को वह एक अन्य मामले में पुलिस हिरासत में था, जिसके कारण अदालत में पेश नहीं हो सका और अपने वकील को भी सूचना नहीं दे पाया। इसके चलते अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे।
बाद में 8 दिसंबर 2025 को उसे प्रोडक्शन वारंट पर अदालत में पेश किया गया। तब से वह न्यायिक हिरासत में था। बचाव पक्ष ने कहा कि गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं हुई थी। राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी की गैरहाजिरी दूसरे मामले में हिरासत के कारण हुई। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है, इसलिए आगे हिरासत में रखना उचित नहीं है। अन्य मामले में वांछित नहीं होने पर शर्तें पूरी करते ही उसे रिहा किया जाएगा।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी को इससे पहले 30 जनवरी 2024 को जमानत मिल चुकी थी। 11 सितंबर 2025 को वह एक अन्य मामले में पुलिस हिरासत में था, जिसके कारण अदालत में पेश नहीं हो सका और अपने वकील को भी सूचना नहीं दे पाया। इसके चलते अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे।
विज्ञापन
बाद में 8 दिसंबर 2025 को उसे प्रोडक्शन वारंट पर अदालत में पेश किया गया। तब से वह न्यायिक हिरासत में था। बचाव पक्ष ने कहा कि गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं हुई थी। राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी की गैरहाजिरी दूसरे मामले में हिरासत के कारण हुई। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है, इसलिए आगे हिरासत में रखना उचित नहीं है। अन्य मामले में वांछित नहीं होने पर शर्तें पूरी करते ही उसे रिहा किया जाएगा।