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Mahendragarh-Narnaul News: शादी से पहले मैं भी था घोड़ा बिना लगाम रे
Thu, 09 Mar 2023 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 09 Mar 2023 11:46 PM IST
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श्री रामलीला परिषद में आयोजित महामुर्ख सम्मेलन में उपस्थित मुख्यातिथि व शहरवासी।
महेंद्रगढ़। प्रदेश के महेंद्रगढ़ में होली के पावन पर्व धुलेंडी के दिन रामलीला परिषद के रंगमंच पर मास्टर जयनारायण सांस्कृतिक मंच के सौजन्य से 53वां महामूर्ख सम्मेलन के तत्वावधान में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन बुधवार शाम 3 बजे से रात तक चला। मंच का संचालन सुशील शर्मा से किया। सांस्कृतिक मंच के प्रधान नरेश जोशी व सचिव अशोक यादव ने बताया कि कार्यक्रम में पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा उपस्थित रही। महामूर्ख के सिंहासन पर सुधीर दिवान मौजूद रहे।
कार्यक्रम से पहले मूर्खाधीश का शृंगार कर उनको घोड़ी पर बिठाकर भगवान परशुराम चौक से गाजे-बाजे व नाच गानों के साथ सम्मेलन स्थल तक लाया गया। उसके उपरांत जिला गौड़ ब्राह्मण सभा के प्रधान राकेश मैहता, महेश जोशी, अनिल कौशिक, रामौतार शास्त्री, दयाशंकर तिवारी, जेपी मिश्रा, सुरेश लावनिया, वेद प्रकाश, कृष्ण कुमार ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इसी दिन महिला दिवस होने पर मंच द्वारा नगरपालिका की उपप्रधान मंजू कौशिक के नेतृत्व में पहुंची महिलाओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में हंसना व हंसाना मानव जीवन की खुशहाली का प्रतीक है। इसी कड़ी में यह मंच इस तरह का आयोजन पिछले लंबे समय से करता आ रहा है। उन्होंने मंच को 51 हजार की राशि देने की घोषणा की।
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गिरीश कानौड़िया ने द्वारा सुरेश मक्कड़ साहिल द्वारा रचित मां शारदे की वंदना तुझको नमन है हमें प्यार दे मां अशारदे मां, वीणा हृदय की झंकार दे मां, अशारदे मां से कार्यक्रम का प्रारंभ किया। बाल कवि उरांश गौतम ने बड़े ही अच्छे ढंग से, होगा ने बाल बांका हरगिज यदि कर लोगे मन में निश्चय, सब से करबद्ध निवेदन है बोलो भारत माता की जय काव्य पाठ किया।
लोकेश महाकाली नाथ शादी से पहले मैं भी था घोड़ा बिना लगाम रे, हंटरवाली के आते ही समझो काम तमाम रे,सुन सास-ससुर की बेटी तू अभी तलक क्यूं लेटी, मुर्गे ने दे दी बांग रे, क्यूं पड़ी पसारे टांग रे, सुन साढू जी की साली। जाग मेरी घरवाली। सरफ नानपारवी बहराइची उत्तर प्रदेश, लबों से फूल खिलाने का सिलसिला रखना, किसी ने कांपते होठों से इलतिजा की तरह है गजल सुना कर लोगों की खूब तालियां बटोरी। स्थानीय कवि सुरेश मक्कड़ उर्फ साहिल ने बस इतना ही तू काम कर ले, अखबारा म्हं नाम कर ले और किस में भी करना सके तो खुद ने हीं बदनाम कर ले। कानपुर पधारे हेमंत पांडेने हरा लगा के मरना है और लाल लगाकर मरना है, उस साल लगाना पाए थे, इस साल लगाकर मरना है, बाबा से पूछा अंतिम इच्छा कान में मेरे बोले हैं, मल्लिका शेरावत के गालों पर गुलाल लगाकर मरना है।
दिनेश देसी घी शाहपुरा मध्य प्रदेश हास्य व्यंग्य कवि ने बात नहीं संस्कारों की, आदर्श भरे नारों की, जब हम ही पड़े बबूल के बोल रहे, तो फिर खता क्या बहारों की सुनाकर तालियां बटोरी। डॉ. कीर्ति काले दिल्ली से पधारी ने बखूबी कवि सम्मेलन का संचालन किया। इस अवसर पर मास्टर जयनारायण सांस्कृतिक मंच के सदस्य, शहर व क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम से पहले मूर्खाधीश का शृंगार कर उनको घोड़ी पर बिठाकर भगवान परशुराम चौक से गाजे-बाजे व नाच गानों के साथ सम्मेलन स्थल तक लाया गया। उसके उपरांत जिला गौड़ ब्राह्मण सभा के प्रधान राकेश मैहता, महेश जोशी, अनिल कौशिक, रामौतार शास्त्री, दयाशंकर तिवारी, जेपी मिश्रा, सुरेश लावनिया, वेद प्रकाश, कृष्ण कुमार ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इसी दिन महिला दिवस होने पर मंच द्वारा नगरपालिका की उपप्रधान मंजू कौशिक के नेतृत्व में पहुंची महिलाओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में हंसना व हंसाना मानव जीवन की खुशहाली का प्रतीक है। इसी कड़ी में यह मंच इस तरह का आयोजन पिछले लंबे समय से करता आ रहा है। उन्होंने मंच को 51 हजार की राशि देने की घोषणा की।
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गिरीश कानौड़िया ने द्वारा सुरेश मक्कड़ साहिल द्वारा रचित मां शारदे की वंदना तुझको नमन है हमें प्यार दे मां अशारदे मां, वीणा हृदय की झंकार दे मां, अशारदे मां से कार्यक्रम का प्रारंभ किया। बाल कवि उरांश गौतम ने बड़े ही अच्छे ढंग से, होगा ने बाल बांका हरगिज यदि कर लोगे मन में निश्चय, सब से करबद्ध निवेदन है बोलो भारत माता की जय काव्य पाठ किया।
लोकेश महाकाली नाथ शादी से पहले मैं भी था घोड़ा बिना लगाम रे, हंटरवाली के आते ही समझो काम तमाम रे,सुन सास-ससुर की बेटी तू अभी तलक क्यूं लेटी, मुर्गे ने दे दी बांग रे, क्यूं पड़ी पसारे टांग रे, सुन साढू जी की साली। जाग मेरी घरवाली। सरफ नानपारवी बहराइची उत्तर प्रदेश, लबों से फूल खिलाने का सिलसिला रखना, किसी ने कांपते होठों से इलतिजा की तरह है गजल सुना कर लोगों की खूब तालियां बटोरी। स्थानीय कवि सुरेश मक्कड़ उर्फ साहिल ने बस इतना ही तू काम कर ले, अखबारा म्हं नाम कर ले और किस में भी करना सके तो खुद ने हीं बदनाम कर ले। कानपुर पधारे हेमंत पांडेने हरा लगा के मरना है और लाल लगाकर मरना है, उस साल लगाना पाए थे, इस साल लगाकर मरना है, बाबा से पूछा अंतिम इच्छा कान में मेरे बोले हैं, मल्लिका शेरावत के गालों पर गुलाल लगाकर मरना है।
दिनेश देसी घी शाहपुरा मध्य प्रदेश हास्य व्यंग्य कवि ने बात नहीं संस्कारों की, आदर्श भरे नारों की, जब हम ही पड़े बबूल के बोल रहे, तो फिर खता क्या बहारों की सुनाकर तालियां बटोरी। डॉ. कीर्ति काले दिल्ली से पधारी ने बखूबी कवि सम्मेलन का संचालन किया। इस अवसर पर मास्टर जयनारायण सांस्कृतिक मंच के सदस्य, शहर व क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।