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विद्यार्थी पीजी में लुटने को मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sun, 19 Jun 2016 11:12 PM IST
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विद्यार्थियों को हो रही परेशानी
- फोटो : फाइल फोटो
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जिले के कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा नहीं होने से विद्यार्थी पीजी संचालकों से लुटने को मजबूर हैं। 11 राजकीय कॉलेजों में अन्य जिलों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में कॉलेजों में रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण निजी संसाधनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हॉस्टलों की व्यवस्था नहीं होने के कारण जिले के बाजार भी प्रभावित है। व्यापारियों का कहना है कि जिले के कॉलेजों में यदि हॉस्टलों की व्यवस्था होती तो भारी संख्या में बाहरी बच्चे भी यहां पढ़ने आते। ऐसी स्थिति में जिले के बाजार, कोचिंग और अन्य संस्थान गुलजार होते। वर्तमान में नारनौल के पीजी कॉलेज में बने वर्षों पुराने एकमात्र छात्रावास की हालत भूतिया बंगले जैसी है। यहां कई वर्षों से कोई विद्यार्थी नहीं रह रहा है। अब नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हो रही है। ऐसे में कई बाहर के विद्यार्थी यहां रहना भी चाहते हैं, मगर छात्रावास नहीं होने के कारण अब उन्हें बाहर किराए पर कमरे लेकर रहना पड़ेगा।
खंडहर होता जा रहा है नारनौल पीजी कॉलेज का छात्रावास
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना छात्रावास प्रदेश के सबसे पुराने छात्रावासों में से एक है। जानकारी के अनुसार विवि कैंपस को छोड़कर प्रदेश के केवल 12 कॉलेजों में छात्रावास बने हैं। इनमें रोहतक, गुड़गांव, नारनौल, पंचकूला और हिसार में दो-दो, सिरसा और फतेहाबाद में एक-एक हास्टल बना हुआ है। नारनौल में बने हास्टल का उद्घाटन 15 अगस्त 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल ने किया था। इसके बाद से 2012 तक इसमें बने 48 कमरों में विद्यार्थी रहा करते थे, मगर 2012 के बाद इस हास्टल की हालत खराब होने लगी। इस कारण न तो विद्यार्थी इसमें रहना पसंद कर रहे और न ही कॉलेज प्रशासन भी इस हास्टल में बच्चों को ठहराना चाहते हैं। इस कारण 2013 से इस हास्टल में कोई भी विद्यार्थी नहीं रह रहा है।
जर्जर हो चुका है यह हास्टल
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना हास्टल बिल्कुल जर्जर हो चुका है। इसके कमरों के खिड़की और दरवाजे टूटे हैं। बाथरूम का बुरा हाल है। छत टपकती है। खंडहर हो चुके इस हास्टल की अब दिवारों में भी सीलन आ चुकी है। यह गिरने के कगार पर पहुंच गई है। एक जगह से तो हास्टल की दीवार भी गिर गई है।
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झाड़ियों का है अब साम्राज्य
यहां के पीजी कॉलेज में बने हास्टल में अब झाड़ियों का साम्राज्य है। यहां चारों तरफ झाड़ियां ही झाड़ियां खड़ी हैं। हास्टल परिसर में भी कई जगह कांटेदार और गाजर घास का साम्राज्य है। इस कारण यहां पर अब लोगों को जाने से भी डर लगने लगा है।
हो सकता है इसमें सुधार
नारनौल के पीजी कॉलेज में बने छात्रावास में सुधार हो सकता है। शहर के पीजी कॉलेज में पीजी के कई ऐसे कोर्स हैं, जो एमडीयू द्वारा एक या दो जगह ही कराए जाते हैं। ऐसे में पीजी करने वाले छात्रों के अलावा बाहर से यूजी करने वाले छात्र भी यहां के कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। इसलिए उनको यहां की बजाए बाहर रहना पड़ता है। इससे उनको भारी परेशानी होती है।
महिला कॉलेज में है 100 छात्राओं के लिए छात्रावास
नारनौल के महिला कॉलेज में 100 छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा है। यहां पर छात्रावास की सुविधा होने के कारण आसपास और दूरदराज से यहां पर 95 छात्राएं ठहरी हैं। इससे इन छात्राओं को काफी फायदा हो रहा है।
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खंडहर होता जा रहा है नारनौल पीजी कॉलेज का छात्रावास
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना छात्रावास प्रदेश के सबसे पुराने छात्रावासों में से एक है। जानकारी के अनुसार विवि कैंपस को छोड़कर प्रदेश के केवल 12 कॉलेजों में छात्रावास बने हैं। इनमें रोहतक, गुड़गांव, नारनौल, पंचकूला और हिसार में दो-दो, सिरसा और फतेहाबाद में एक-एक हास्टल बना हुआ है। नारनौल में बने हास्टल का उद्घाटन 15 अगस्त 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल ने किया था। इसके बाद से 2012 तक इसमें बने 48 कमरों में विद्यार्थी रहा करते थे, मगर 2012 के बाद इस हास्टल की हालत खराब होने लगी। इस कारण न तो विद्यार्थी इसमें रहना पसंद कर रहे और न ही कॉलेज प्रशासन भी इस हास्टल में बच्चों को ठहराना चाहते हैं। इस कारण 2013 से इस हास्टल में कोई भी विद्यार्थी नहीं रह रहा है।
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जर्जर हो चुका है यह हास्टल
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना हास्टल बिल्कुल जर्जर हो चुका है। इसके कमरों के खिड़की और दरवाजे टूटे हैं। बाथरूम का बुरा हाल है। छत टपकती है। खंडहर हो चुके इस हास्टल की अब दिवारों में भी सीलन आ चुकी है। यह गिरने के कगार पर पहुंच गई है। एक जगह से तो हास्टल की दीवार भी गिर गई है।
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झाड़ियों का है अब साम्राज्य
यहां के पीजी कॉलेज में बने हास्टल में अब झाड़ियों का साम्राज्य है। यहां चारों तरफ झाड़ियां ही झाड़ियां खड़ी हैं। हास्टल परिसर में भी कई जगह कांटेदार और गाजर घास का साम्राज्य है। इस कारण यहां पर अब लोगों को जाने से भी डर लगने लगा है।
हो सकता है इसमें सुधार
नारनौल के पीजी कॉलेज में बने छात्रावास में सुधार हो सकता है। शहर के पीजी कॉलेज में पीजी के कई ऐसे कोर्स हैं, जो एमडीयू द्वारा एक या दो जगह ही कराए जाते हैं। ऐसे में पीजी करने वाले छात्रों के अलावा बाहर से यूजी करने वाले छात्र भी यहां के कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। इसलिए उनको यहां की बजाए बाहर रहना पड़ता है। इससे उनको भारी परेशानी होती है।
महिला कॉलेज में है 100 छात्राओं के लिए छात्रावास
नारनौल के महिला कॉलेज में 100 छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा है। यहां पर छात्रावास की सुविधा होने के कारण आसपास और दूरदराज से यहां पर 95 छात्राएं ठहरी हैं। इससे इन छात्राओं को काफी फायदा हो रहा है।