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Mahendragarh-Narnaul News: सौ से अधिक स्थानों पर किया गया होलिका दहन
Thu, 13 Mar 2025 11:11 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 13 Mar 2025 11:11 PM IST
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फोटो नंबर-05नारनौल में पारंपरिक रूप से होली का पूजन करती महिलाएं। संवाद
नारनौल। क्षेत्र में रंगों का त्योहार होली वीरवार को धूमधाम से मनाई गई। होली को लेकर महिलाओं ने सुबह से ही पारंपरिक तरीके से होली का पूजन करना शुरू कर दिया था।
इस बार होली का पूजन भद्रा के चलते साढ़े दस बजे तक होने के कारण महिलाएं सुबह जल्दी उठीं और हलवा व पूरी बनाकर होली का पूजन किया। महिलाओं ने होली का उपवास रखा व बच्चों संग सूत के धागे से परिक्रमा कर पूजन किया। शहर में एक सौ से अधिक स्थानों पर होली का दहन किया गया। होली पूजन को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह रहा। होली के गीत भी गाए। इस बार भद्रा का साया रहा। इसके कारण लगभग सभी जगह सुबह साढ़े दस बजे तक होली का पूजन किया गया व रात 11.30 बजे होलिका दहन किया गया।
रात होलिका दहन के समय सभी मोहल्ले के लोग एकत्रित हुए और सभी ने मिलकर होलिका दहन किया। होलिका दहन के बाद होली की परिक्रमा की गई। होली में जौ व गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि डाली गईं। होली की आग में जौ की बालियों को भूनकर प्रसाद के रूप में खाया और सबको बांटा गया। होलिका दहन के बाद सभी ने एक दूसरे को होली के रंगों का टीका भी लगाया। होली के पर्व को लेकर आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि यह त्योहार आपसी प्रेम व मेलजोल का त्योहार है।
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इस बार होली का पूजन भद्रा के चलते साढ़े दस बजे तक होने के कारण महिलाएं सुबह जल्दी उठीं और हलवा व पूरी बनाकर होली का पूजन किया। महिलाओं ने होली का उपवास रखा व बच्चों संग सूत के धागे से परिक्रमा कर पूजन किया। शहर में एक सौ से अधिक स्थानों पर होली का दहन किया गया। होली पूजन को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह रहा। होली के गीत भी गाए। इस बार भद्रा का साया रहा। इसके कारण लगभग सभी जगह सुबह साढ़े दस बजे तक होली का पूजन किया गया व रात 11.30 बजे होलिका दहन किया गया।
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रात होलिका दहन के समय सभी मोहल्ले के लोग एकत्रित हुए और सभी ने मिलकर होलिका दहन किया। होलिका दहन के बाद होली की परिक्रमा की गई। होली में जौ व गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि डाली गईं। होली की आग में जौ की बालियों को भूनकर प्रसाद के रूप में खाया और सबको बांटा गया। होलिका दहन के बाद सभी ने एक दूसरे को होली के रंगों का टीका भी लगाया। होली के पर्व को लेकर आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि यह त्योहार आपसी प्रेम व मेलजोल का त्योहार है।
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