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आज से लगेंगे होलाष्टक,नहीं होंगे शुभ कार्य: राहुल
Thu, 06 Mar 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:47 PM IST
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फोटो संख्या:61- पंडित राहुल भारद्वाज--संवाद
- फोटो : एसपी कार्यालय के पास पुलिस कर्मी की बाइक का चालान करते यातायात प्रभारी शैलेंद्र सिंह ।
महेंद्रगढ़। शुक्रवार से होलाष्टक प्रारंभ हो रहा है। 13 मार्च होलिका दहन के बाद होलाष्टक समाप्त हो जाएगा।
होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह मुंडन, नामकरण, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य करना वर्जित है। होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस कारण शुभ कार्य वर्जित बताए गए है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि होलाष्टक की आठ रात का काफी महत्व है। इन आठ रातों में की गई साधनाएं जल्दी सफल होती हैं। इन रातों में तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधनाएं करते हैं।
ज्योतिष की मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों में अलग-अलग ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं। अष्टमी को चंद्र, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, पूर्णिमा को राहु उग्र स्थिति में रहता है। नौ ग्रहों की उग्र स्थिति की वजह से इन दिनों में मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होली तक यातना दी। इन आठ दिनों में प्रकृति का वातावरण उग्र हो गया था। इससे ये समय शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाने लगा।
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14 मार्च से शुरू हो जाएगा खरमास
14 मार्च को सूर्य कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करेगा। इससे खरमास (मलमास) की शुरुआत होगी। खरमास के दिनों में भी विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक कामों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेगा और खरमास समाप्त होगा। होलाष्टक और खरमास की वजह से 7 मार्च से 14 अप्रैल तक शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। मांगलिक कार्यों के लिए किसी भी शुभ कार्य के लिए गुरु का अच्छी स्थिति में होना जरूरी है। यदि ये ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं तो मांगलिक कार्य के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। खरमास के समय में सूर्य के तेज की वजह से गुरु का बल कमजोर हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।
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होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह मुंडन, नामकरण, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य करना वर्जित है। होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस कारण शुभ कार्य वर्जित बताए गए है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि होलाष्टक की आठ रात का काफी महत्व है। इन आठ रातों में की गई साधनाएं जल्दी सफल होती हैं। इन रातों में तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधनाएं करते हैं।
ज्योतिष की मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों में अलग-अलग ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं। अष्टमी को चंद्र, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, पूर्णिमा को राहु उग्र स्थिति में रहता है। नौ ग्रहों की उग्र स्थिति की वजह से इन दिनों में मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
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उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होली तक यातना दी। इन आठ दिनों में प्रकृति का वातावरण उग्र हो गया था। इससे ये समय शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाने लगा।
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14 मार्च से शुरू हो जाएगा खरमास
14 मार्च को सूर्य कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करेगा। इससे खरमास (मलमास) की शुरुआत होगी। खरमास के दिनों में भी विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक कामों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेगा और खरमास समाप्त होगा। होलाष्टक और खरमास की वजह से 7 मार्च से 14 अप्रैल तक शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। मांगलिक कार्यों के लिए किसी भी शुभ कार्य के लिए गुरु का अच्छी स्थिति में होना जरूरी है। यदि ये ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं तो मांगलिक कार्य के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। खरमास के समय में सूर्य के तेज की वजह से गुरु का बल कमजोर हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।