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हकेंविवि में जांच के लिए पहुंची टीम
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हकेंविवि में जांच के दौरान पूछताछ करती राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच टीम की चेयरपर्सन डॉ. स?
- फोटो : Narnol
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राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की टीम हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय(हकेंविवि) में जांच के लिए पहुंची। आयोग के पास कर्मचारियों एवं शिक्षकों के साथ उत्पीड़न किए जाने के शिकायतें पहुंची थी। टीम ने लगभग चार घंटे तक सघन जांच की। टीम ने रिपोर्ट एचआरडी मंत्रालय को सौंप दी है। लगभग 15 दिन बाद इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की पिछड़ वर्ग कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ उत्पीड़न, नियुक्तियों को लेकर तथा नौकरियों को लेकर कई शिकायत पहुंची थी। जिसमें सात शिकायतें व्यक्तिगत तथा 10 से 12 शिकायतें बिना नाम के गई हुई थीं। उन शिकायतों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की टीम डॉ. सुधा यादव के नेतृत्व में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय पहुंची। टीम की चेयरपर्सन राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या डॉ. सुधा यादव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. जीसी चौहान, केंद्र शिक्षा मंत्रालय के निदेेशक विश्वजीत, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश यादव, सदस्य कौशलेंद्र पेटल, वरिष्ठ सलाहकार एडवोकेट हर्षित, आयोग के चेयरमैन के निजी सचिव दिनेश साहनी शामिल थे। इस दौरान कुलपति प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार, कुलसचिव जेपी भुक्कर उपस्थित रहे। टीम ने शिकायत कर्ताओं से उनका पक्ष सुना। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। करीब पांच घंटे तक आयोग की टीम ने दोनों पक्षों को सुना। टीम ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी है।
कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. सुधा यादव ने बताया कि विवि 2009 में अस्तित्व में आ गया था जबकि 2014 तक रोस्टर ही नहीं बनाया गया। 2015 में रोस्टर बनें उनमें कोई क्लीयर्टी नहीं है। अलग-अलग रोस्टर बनाए गए हैं। रोस्टर में जितनी सीटें आनी चाहिए वो नहीं है। बिना रोस्टर के कैसे पता चले कि कितनी सीटें सेशन करवाई गई तथा कितनी भरीं गई, जब ये चीजें पता नहीं चली तो रोस्टर कहां लागू हुआ। अगर रोस्टर के तहत नियुक्ति दी गई तो बिना रोस्टर के आरक्षण कैसे दे दिया? ये रोस्टर संबंधित कमियां हैं।
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मैंने मई 2021 में आयोग को शिकायत की थी। मेरे पास परीक्षा नियंत्रक का चार्ज था। एक वर्ष पहले विवि गेट के बाहर पाली के लोगों ने धरना प्रदर्शन किया था। इसमें विवि के अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना बताया गया था और मुझ से विवि के अधिकारियों ने परीक्षा नियंत्रक का चार्ज
वापस ले लिया था। -डॉ. विपुल यादव, शिकायतकर्ता।
2011 में मैं ठेके के आधार पर लगा था। 2013 में पक्के हो गए थे। इस दौरान मुझे ठेके से संबंधित जो फायदा मिलना था वो नहीं दिया गया जबकि अन्य मेरे साथ लगे स्टाफ सदस्यों को दे दिया गया। मैंने विश्वविद्यालय से आरटीआई संबंधित जानकारी मांगी गई थी। उसको लेकर मेरे खिलाफ नोटिस जारी कर दिया। -अजयपाल, अस्सिटेंट प्रोफेसर, शिकायतकर्ता।
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की पिछड़ वर्ग कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ उत्पीड़न, नियुक्तियों को लेकर तथा नौकरियों को लेकर कई शिकायत पहुंची थी। जिसमें सात शिकायतें व्यक्तिगत तथा 10 से 12 शिकायतें बिना नाम के गई हुई थीं। उन शिकायतों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की टीम डॉ. सुधा यादव के नेतृत्व में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय पहुंची। टीम की चेयरपर्सन राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या डॉ. सुधा यादव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. जीसी चौहान, केंद्र शिक्षा मंत्रालय के निदेेशक विश्वजीत, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश यादव, सदस्य कौशलेंद्र पेटल, वरिष्ठ सलाहकार एडवोकेट हर्षित, आयोग के चेयरमैन के निजी सचिव दिनेश साहनी शामिल थे। इस दौरान कुलपति प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार, कुलसचिव जेपी भुक्कर उपस्थित रहे। टीम ने शिकायत कर्ताओं से उनका पक्ष सुना। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। करीब पांच घंटे तक आयोग की टीम ने दोनों पक्षों को सुना। टीम ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी है।
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कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. सुधा यादव ने बताया कि विवि 2009 में अस्तित्व में आ गया था जबकि 2014 तक रोस्टर ही नहीं बनाया गया। 2015 में रोस्टर बनें उनमें कोई क्लीयर्टी नहीं है। अलग-अलग रोस्टर बनाए गए हैं। रोस्टर में जितनी सीटें आनी चाहिए वो नहीं है। बिना रोस्टर के कैसे पता चले कि कितनी सीटें सेशन करवाई गई तथा कितनी भरीं गई, जब ये चीजें पता नहीं चली तो रोस्टर कहां लागू हुआ। अगर रोस्टर के तहत नियुक्ति दी गई तो बिना रोस्टर के आरक्षण कैसे दे दिया? ये रोस्टर संबंधित कमियां हैं।
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मैंने मई 2021 में आयोग को शिकायत की थी। मेरे पास परीक्षा नियंत्रक का चार्ज था। एक वर्ष पहले विवि गेट के बाहर पाली के लोगों ने धरना प्रदर्शन किया था। इसमें विवि के अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना बताया गया था और मुझ से विवि के अधिकारियों ने परीक्षा नियंत्रक का चार्ज
वापस ले लिया था। -डॉ. विपुल यादव, शिकायतकर्ता।
2011 में मैं ठेके के आधार पर लगा था। 2013 में पक्के हो गए थे। इस दौरान मुझे ठेके से संबंधित जो फायदा मिलना था वो नहीं दिया गया जबकि अन्य मेरे साथ लगे स्टाफ सदस्यों को दे दिया गया। मैंने विश्वविद्यालय से आरटीआई संबंधित जानकारी मांगी गई थी। उसको लेकर मेरे खिलाफ नोटिस जारी कर दिया। -अजयपाल, अस्सिटेंट प्रोफेसर, शिकायतकर्ता।