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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि कुलपति ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी पर दो पुस्तकों का किया विमोचन
Tue, 31 Dec 2024 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 31 Dec 2024 01:28 AM IST
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कृषि जैव प्रौद्योगिकी पर केंद्रित पुस्तकों का विमोचन करते कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार --स्रोत- ह
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में शिक्षक डॉ. हुमीरा सोनाह और डॉ. रुपेश देशमुख की ओर से संपादित दो पुस्तकों का विमोचन किया। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने संपादकों के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और कहा कि ये पुस्तकें कृषि जैव प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि ये पुस्तकें इस क्षेत्र में अत्याधुनिक शोध का व्यवस्थित और व्यापक अवलोकन प्रदान करती हैं, जिससे शोधकर्ताओं को अपने कार्यों में नई दृष्टि और उन्नति मिलेगी। कुलपति ने कहा कि ये पुस्तकें शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से ज्ञान और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार भी उपस्थित रहे।
बायोफोर्टिफिकेशन इन सीरियल्स की सपांदक डॉ. हुमीरा सोनाह ने बताया कि यह उनकी यह पुस्तक अनाज फसलों में उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और तनाव सहनशीलता जैसे गुणों को बढ़ाने के लिए आनुवंशिक और जीनोमिक डेटा के उपयोग पर केंद्रित है। यह पुस्तक फसल सुधार क्षेत्र के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत बनेगी।
एडवांस इन एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी के संपादक डॉ. रुपेश देशमुख ने बताया कि उनकी यह पुस्तक जीनोम संपादन और आनुवंशिक संशोधन जैसे फसल सुधार प्रौद्योगिकियों में नवीनतम प्रगति पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल कृषि प्रथाओं को बेहतर बनाने में समाज की आवश्यकताओं को पूरा करती है, बल्कि शोधकर्ताओं को इन तकनीकों की गहन समझ भी प्रदान करती है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने संकाय सदस्यों की इस उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि ऐसी पुस्तकें विश्वविद्यालय को अकादमिक और शोध उत्कृष्टता के मोर्चे पर स्थापित करने में मददगार हैं।
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बायोफोर्टिफिकेशन इन सीरियल्स की सपांदक डॉ. हुमीरा सोनाह ने बताया कि यह उनकी यह पुस्तक अनाज फसलों में उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और तनाव सहनशीलता जैसे गुणों को बढ़ाने के लिए आनुवंशिक और जीनोमिक डेटा के उपयोग पर केंद्रित है। यह पुस्तक फसल सुधार क्षेत्र के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत बनेगी।
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एडवांस इन एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी के संपादक डॉ. रुपेश देशमुख ने बताया कि उनकी यह पुस्तक जीनोम संपादन और आनुवंशिक संशोधन जैसे फसल सुधार प्रौद्योगिकियों में नवीनतम प्रगति पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल कृषि प्रथाओं को बेहतर बनाने में समाज की आवश्यकताओं को पूरा करती है, बल्कि शोधकर्ताओं को इन तकनीकों की गहन समझ भी प्रदान करती है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने संकाय सदस्यों की इस उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि ऐसी पुस्तकें विश्वविद्यालय को अकादमिक और शोध उत्कृष्टता के मोर्चे पर स्थापित करने में मददगार हैं।
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