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भारी बारिश बनी आफत, रेवाड़ी से रिंगस जाने वाली पैसेंजर चार घंटे खड़ी रही
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निजामपुर नलवाटी क्षेत्र में गांवों में भरा बरसाती पानी।
- फोटो : Narnol
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झमाझम बारिश से शुक्रवार को कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात नजर आए तो कई गांवों में मकान गिरने की सूचना है। निजामपुर खंड में भारी बारिश के चलते लगभग 28 गांव जलभराव से प्रभावित हुए। प्रशासन ने जलभराव वाले गांवों का दौरा कर जायजा लिया व जेसीबी से पानी की निकासी की गई। बारिश के चलते गांव बसीरपुर में दो मकान, नारेडी व छिलरो में एक-एक मकान गिर गया। वहीं निजामपुर खंड के कई गांवों में बने रेलवे के अंडरपास बारिश के पानी से भर गए। जिससे लोगों का आवागमन बंद हो गया। गांव नारेडी में रेलवे लाइन के ऊपर से पानी गुजरने लग गया था। जिससे रेवाड़ी से रिंगस की ओर से जाने वाली पैसेंजर ट्रेन प्रभावित हुई। ट्रेन 11 बजे बजकर 50 मिनट पर रेवाड़ी से नारनौल पहुंची। निजामपुर में पानी होने से ट्रेन दोपहर तीन बजे रिंगस के लिए चली। इससे यात्रियों को असुविधा हुई।
ग्रामीणों के अनुसार गांव मुसनौता में फिरनी रास्तों में लगभग पांच फिट बरसाती पानी जमा होने के कारण ग्रामीणों का आवामन अवरूद्ध हो गया। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी हरिराम यादव ने बताया कि चार जेसीबी मशीने जलभराव वाली जगहों पर भेजे गई थी। गांव कारोली, मारोली, मुसनौता व पांचनौता में जेसीबी मशीन से सड़क को तोड़कर पानी की निकासी की गई।
डॉर्क जोन में बारिश से किसानों को खिले
नांगल चौधरी। लगातार दो दिन से जारी बारिश से जहां किसानों में खुशी की लहर है, वहीं भारी बरसात से लोगों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे की अनाज मंडी बारिश के चलते तालाब बन चुकी है व कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पानी जमा होने के कारण बच्चों को खासी परेशानी उठानी पड़ी है। ग्रामीण क्षेत्र के अनेक गांव जल-मग्न हो चुके है और बरसात का पानी घरों में भर गया। दूसरी तरफ अच्छी बरसात से किसानों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है। वहीं बुधवार की शाम से शुरू हुई बारिश शुक्रवार दोपहर तक रुक रुक कर जारी रही। गुरूवार को तो दिन-भर बरसात के बादल मंडराते रहे। वहीं शुक्रवार को अल सुबह ही बरसात होनी शुरू हो गई और बारिश से कस्बा नांगल चौधरी का अधिकांश हिस्सा जलमग्र हो गया। वहीं बड़ी कक्षाओं में अध्ययन करने वाली छात्राऐं स्कूल परिसर से पानी के बीच होकर गुजरने पर विवश हो गई। सीमावर्ती गांव ब्राह्मणवास में तो हालात बाढ़ जैसे बन गए है। ग्रामीण रमेश, योगेश, रामौतार व प्रभातीलाल ने बताया कि दो दिन से जारी बरसात के कारण वर्षा का पानी जल निकासी के अवरूद्ध होने के कारण गांव में घुस गया।
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वकीलों का कामकाज भी रहा प्रभावित
कस्बे में तहसील कार्यालय के पास बैठने वाले वकील तबके के लोगों को भी बरसात ने परेशानी में डाल दिया और वकीलों लिए बैठने के लिए बनाए गए टीन शेड बरसात के कारण रिसने लगे। बरसाती पानी के कारण वकीलों ने अपना दैनिक कामकाज बीच में ही छोड़ते हुए अपने बस्ते समेटने में ही अपनी भलाई समझी।
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ग्रामीणों के अनुसार गांव मुसनौता में फिरनी रास्तों में लगभग पांच फिट बरसाती पानी जमा होने के कारण ग्रामीणों का आवामन अवरूद्ध हो गया। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी हरिराम यादव ने बताया कि चार जेसीबी मशीने जलभराव वाली जगहों पर भेजे गई थी। गांव कारोली, मारोली, मुसनौता व पांचनौता में जेसीबी मशीन से सड़क को तोड़कर पानी की निकासी की गई।
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डॉर्क जोन में बारिश से किसानों को खिले
नांगल चौधरी। लगातार दो दिन से जारी बारिश से जहां किसानों में खुशी की लहर है, वहीं भारी बरसात से लोगों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे की अनाज मंडी बारिश के चलते तालाब बन चुकी है व कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पानी जमा होने के कारण बच्चों को खासी परेशानी उठानी पड़ी है। ग्रामीण क्षेत्र के अनेक गांव जल-मग्न हो चुके है और बरसात का पानी घरों में भर गया। दूसरी तरफ अच्छी बरसात से किसानों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है। वहीं बुधवार की शाम से शुरू हुई बारिश शुक्रवार दोपहर तक रुक रुक कर जारी रही। गुरूवार को तो दिन-भर बरसात के बादल मंडराते रहे। वहीं शुक्रवार को अल सुबह ही बरसात होनी शुरू हो गई और बारिश से कस्बा नांगल चौधरी का अधिकांश हिस्सा जलमग्र हो गया। वहीं बड़ी कक्षाओं में अध्ययन करने वाली छात्राऐं स्कूल परिसर से पानी के बीच होकर गुजरने पर विवश हो गई। सीमावर्ती गांव ब्राह्मणवास में तो हालात बाढ़ जैसे बन गए है। ग्रामीण रमेश, योगेश, रामौतार व प्रभातीलाल ने बताया कि दो दिन से जारी बरसात के कारण वर्षा का पानी जल निकासी के अवरूद्ध होने के कारण गांव में घुस गया।
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वकीलों का कामकाज भी रहा प्रभावित
कस्बे में तहसील कार्यालय के पास बैठने वाले वकील तबके के लोगों को भी बरसात ने परेशानी में डाल दिया और वकीलों लिए बैठने के लिए बनाए गए टीन शेड बरसात के कारण रिसने लगे। बरसाती पानी के कारण वकीलों ने अपना दैनिक कामकाज बीच में ही छोड़ते हुए अपने बस्ते समेटने में ही अपनी भलाई समझी।