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Mahendragarh-Narnaul News: ऑफलाइन दवाइयों की खरीद को स्वास्थ्य विभाग ने किया सेंट्रलाइज्ड

Sun, 11 Jun 2023 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 11 Jun 2023 12:00 AM IST
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Health department centralized the purchase of offline medicines
संवाद न्यूज एजेंसी
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महेंद्रगढ़। स्वास्थ्य विभाग ने ऑफलाइन दवाइयों की खरीद को सेंट्रलाइज्ड कर दिया है। अब राजकीय अस्पताल केवल जीवनरक्षक दवाइयां ही खरीद सकेंगे। उनको जिला अस्पताल में अपनी डिमांड भेजनी होगी।
उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र, उप नागरिक अस्पताल और नागरिक अस्पताल को जिला अस्पताल में 15 तारीख तक डिमांड भेजनी होगी। 10 दिन बाद 25 तारीख तक उनकी डिमांड अनुसार दवाइयां मिल जाएंगी। ऐसा करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और बड़े अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं रहेगी। स्वास्थ्य विभाग की डीजी के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू हो गई है।
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स्वास्थ्य विभाग की डीजी सोनिया त्रिखा ने लगभग दो महीने के अंदर प्रदेश के बहुत से अस्पतालों का निरीक्षण किया था। उस समय अधिकतर बड़े अस्पतालों में दवाइयों की कमियां मिली थीं। बजट पूरा जारी होने के बाद भी मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पा रही थीं। इसका जब मूल्यांकन किया गया तो पता लगा कि स्थानीय स्तर पर जो बजट मिलता है, उससे छोटे अस्पताल दवाइयां खरीद लेते थे। इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम होने से दवाइयां स्टाॅक में पड़ी रह जाती है। वहीं दूसरी ओर बड़े अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से दवाइयों की खपत अधिक होती है। लोकल बजट खर्च करने के बाद भी मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पाती थीं।
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एक कंपनी की दवाइयों में कीमतों का मिलता था फर्क
अस्पताल में दवाइयां खत्म हो जाती तो वेयर हाउस भिवानी से दवाइयां मंगवाई जाती थीं। जब वेयर हाउस में दवाइयां नहीं होती तो अस्पताल लोकल स्तर खरीद कर लेते थे। एक कंपनी की दवाइयों में कीमतों का फर्क मिलता था। जैसे गोलियों का एक पैकेट को अस्पताल 200 रुपये में खरीद रहा है और वहीं दूसरा अस्पताल उसे 250 में, तीसरा 175 रुपये में और चौथा 275 रुपये में खरीद रहा था। दवाइयों की कीमतों में फर्क मिलता था। ऐसी खरीद से कहीं न कहीं भ्रष्टाचार का अंदेशा रहता। इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की डीजी सोनिया त्रिखा ने स्थानीय खरीद को बंद कर सेंट्रलाइज्ड कर दिया है।
एक बार खरीद होने पर 45 दिन का मिलेगा स्टॉक
उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र, उप नागरिक अस्पताल और नागरिक अस्पताल को दवाइयों की खरीद के लिए जिला अस्पताल को 15 तारीख तक दवाइयां की डिमांड भेजनी होगी। इसके बाद जिला अस्पताल 20 तारीख तक जिला अस्पताल दवाइयां की डिमांड के लिए चंडीगढ़ से एनएसी लेनी होगी। वहां दो से तीन दिन में अनुमति आने के बाद जिला अस्पताल दवाइयां की खरीद करेगा। एक बार खरीद होने पर सभी अस्पतालों को 45 दिन का स्टॉक मिलेगा।
वर्तमान में चल रही है अस्पतालों में दवाइयां की कमी
वर्तमान में जिले के अधिकतर अस्पतालों में दवाइयां की कमी चल रही है। केवल जीवनरक्षक ही नहीं सामान्य ओपीडी की दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। सरकार की ओर से यह उपरोक्त प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अस्पतालों से डिमांड ली जा रही है। उम्मीद है कि ये दवाइयां 25 जून तक उपलब्ध हो जाएंगी।

केवल ऑफलाइन दवाइयों की खरीद सेंट्रलाइज्ड की गई है। पहले दवाइयों की खरीद में कीमतों का अंतर होता था। इस वजह से यह सिस्टम बदला गया है। जीवनरक्षक दवाइयां अस्पताल अपने स्तर पर जरूरत के अनुसार खरीद सकेंगे।
- रमेश चंद्र आर्य, सिविल सर्जन, नारनौल।
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