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Mahendragarh-Narnaul News: श्रीराम के वनवास से लौटने की कथा सुनाई
Sat, 08 Jun 2024 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 08 Jun 2024 12:18 AM IST
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फोटो संख्या:74- श्रीराम कथा एवं दुर्लभ सत्संग के समापन पर कथा का रसपानी करते श्रद्धालु--स्रोत--
सतनाली। गांव श्यामपुरा के हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा व सत्संग के अंतिम दिन श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ श्रीराम कथा का समापन किया गया।
महाराज हरिदास ने बताया कि रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट गए। जहां उनका विधि विधान पूर्वक राज्याभिषेक किया गया। राम ने अपने प्रजा के सुख-सुविधा सहित सभी समस्याओं का निदान सुचारू तरीके से करते रहे। इनके शासन चलाने की नीति अत्यंत ही सरल थी। न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले सभी इंसान को इंसाफ मिलता था।
जहां दोषी पाए जाने वाले लोगों को सजा दी जाती थी। वहीं निर्दोष को सम्मान और आदर प्रदान किए जाते थे। आज भी इस संसार में लोग राम राज्य की कल्पना करते हैं। क्योंकि राम के शासन काल में किसी भी इंसान के साथ नाइंसाफी नहीं हुई। मानव जीवन को साकार करने का एक मात्र सहारा राम का नाम है। इनके नाम का स्मरण मात्र ही लोगों को जीवन के सन्मार्ग पर ले जाते हैं। ईश्वर का सुमिरन करने से सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है। कथा के अंत में श्रीराम नाम का स्मरण लोगों द्वारा किया गया।
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महाराज हरिदास ने बताया कि रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट गए। जहां उनका विधि विधान पूर्वक राज्याभिषेक किया गया। राम ने अपने प्रजा के सुख-सुविधा सहित सभी समस्याओं का निदान सुचारू तरीके से करते रहे। इनके शासन चलाने की नीति अत्यंत ही सरल थी। न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले सभी इंसान को इंसाफ मिलता था।
जहां दोषी पाए जाने वाले लोगों को सजा दी जाती थी। वहीं निर्दोष को सम्मान और आदर प्रदान किए जाते थे। आज भी इस संसार में लोग राम राज्य की कल्पना करते हैं। क्योंकि राम के शासन काल में किसी भी इंसान के साथ नाइंसाफी नहीं हुई। मानव जीवन को साकार करने का एक मात्र सहारा राम का नाम है। इनके नाम का स्मरण मात्र ही लोगों को जीवन के सन्मार्ग पर ले जाते हैं। ईश्वर का सुमिरन करने से सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है। कथा के अंत में श्रीराम नाम का स्मरण लोगों द्वारा किया गया।
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