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Mahendragarh-Narnaul News: राजस्थान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेगा हकेंवि

Sat, 25 Oct 2025 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 25 Oct 2025 01:00 AM IST
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HCW to survey flood-affected areas of Rajasthan
फोटो संख्या:-58 हकेंवि में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने वाले भूगोल विभाग के दल के
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय(हकेंवि) का भूगोल विभाग राजस्थान के सवाई माधोपुर, उदयपुर और सिरोही जिलों में हाल ही में हुई भारी वर्षा और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का भौगोलिक सर्वेक्षण करेगा। टीम में 44 विद्यार्थी शामिल हैं। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य इन प्राकृतिक आपदाओं से जनजीवन, कृषि, आजीविका और पर्यावरण पर पड़े सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करना है।
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विश्वविद्यालय परिसर से सर्वेक्षण दल को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भौगोलिक सर्वेक्षण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को जनहित में पूरा किया जा सकता है।
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यह अध्ययन विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ समाज से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा। विश्वविद्यालय में भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं। भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएल मीणा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर यह सिखाना है कि समाज में शिक्षा का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
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डॉ. सीएम मीणा और डॉ. खेराज के मार्गदर्शन में रवाना हुए इस अध्ययन दल में दो शोधार्थी प्रदीप कुमार और सुशीला तथा 44 विद्यार्थी शामिल हैं। टीम प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थानीय निवासियों से साक्षात्कार, फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण और स्थल अवलोकन के माध्यम से डेटा एकत्र करेगी। इसके अतिरिक्त, दल सैटेलाइट आधारित जीपीएस उपकरणों का उपयोग कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानिक आंकड़े एकत्र करेगा, जिससे भू-स्थानिक विश्लेषण अधिक सटीक रूप से किया जा सकेगा। यह अध्ययन न केवल आपदा प्रबंधन और पुनर्वास योजनाओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, बल्कि भविष्य में सतत विकास नीतियों और भौगोलिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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