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Mahendragarh-Narnaul News: हकेवि के विद्यार्थियों ने गंगोत्री, उत्तरकाशी और केदारनाथ क्षेत्र का अध्ययन किया
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विद्यार्थियों ने उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र का भौगोलिक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के द्वारा शिक्षकों व विद्यार्थियों के समूह ने भूस्खलन, बाढ़, भूंकप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवदेनशीलता और इस क्षेत्र की विभिन्न भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि अवश्य ही इस व्यावहारिक अनुभव से विद्यार्थी लाभांवित हुए होंगे और यह उनके लिए भविष्य में उपयोगी साबित होगा।
विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि स्थानीय समुदायों पर प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए उत्तराखंड क्षेत्र का व्यापक अध्ययन आवश्यक है। यह सर्वेक्षण उत्तराखंड में 25 अक्तूबर से 3 नवंबर के बीच किया गया। भूगोल विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सीएम मीणा और डॉ. काजल मंडल के नेतृत्व में शोधार्थियों और एमएससी परास्नातक के विद्यार्थियों ने दस दिवसीय सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत गंगोत्री, उत्तरकाशी और केदारनाथ क्षेत्र का अध्ययन किया। इस दौरान, विद्यार्थियों ने इन क्षेत्रों में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारणों, प्रभावों और निवारण उपायों का अध्ययन किया।
विद्यार्थियों की ओर से गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। केदारनाथ क्षेत्र में 2013 में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान किया था। विद्यार्थियों ने पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए पाया कि भौगोलिक कारकों ने आपदा को और बढ़ाया। पुनर्निर्माण में जल निकासी प्रणालियां और पक्की दीवारों के निर्माण ने भूस्खलन पर नियंत्रण पाया है। रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग का भी अध्ययन किया गया, जो न केवल प्राकृतिक आपदाओं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थल हैं।
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विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि स्थानीय समुदायों पर प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए उत्तराखंड क्षेत्र का व्यापक अध्ययन आवश्यक है। यह सर्वेक्षण उत्तराखंड में 25 अक्तूबर से 3 नवंबर के बीच किया गया। भूगोल विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सीएम मीणा और डॉ. काजल मंडल के नेतृत्व में शोधार्थियों और एमएससी परास्नातक के विद्यार्थियों ने दस दिवसीय सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत गंगोत्री, उत्तरकाशी और केदारनाथ क्षेत्र का अध्ययन किया। इस दौरान, विद्यार्थियों ने इन क्षेत्रों में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारणों, प्रभावों और निवारण उपायों का अध्ययन किया।
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विद्यार्थियों की ओर से गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। केदारनाथ क्षेत्र में 2013 में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान किया था। विद्यार्थियों ने पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए पाया कि भौगोलिक कारकों ने आपदा को और बढ़ाया। पुनर्निर्माण में जल निकासी प्रणालियां और पक्की दीवारों के निर्माण ने भूस्खलन पर नियंत्रण पाया है। रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग का भी अध्ययन किया गया, जो न केवल प्राकृतिक आपदाओं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थल हैं।
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