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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि करेगा सर्विकल कैंसर का पता लगाने के लिए बायोसेंसर पर शोध

Thu, 06 Mar 2025 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 06 Mar 2025 11:48 PM IST
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HAKENVI will do research on biosensor to detect cervical cancer
फोटो संख्या:60-हकेंवि संकाय सदस्य डॉ. नीलम विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्व कुमार के साथ--स्र
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से महिलाओं में हो रहे सर्विकल कैंसर के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का पता लगाने के लिए अल्ट्रासेंसिटिव इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर पर शोध होगा।
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इसके लिए विश्वविद्यालय के जैव रसायन विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डाॅ. नीलम को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) से 56.44 लाख रुपये का अनुदान मिला है। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि शोध कार्य महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने में मददगार होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से इस शोध कार्य में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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उन्होंने कहा कि यह शोध न केवल सर्विकल कैंसर से निपटने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य के नवाचारों के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा, जो किफायती और सुलभ समाधान में और विकास को प्रोत्साहित करेगा। डाॅ. नीलम ने बताया कि सर्विकल कैंसर से होने वाली जान की हानि की रोकथाम के लिए इसकी समय पर पहचान करना आवश्यक है। इस दिशा में इस अनुसंधान और नवीन स्क्रीनिंग टूल में निवेश इस घातक बीमारी के खिलाफ लड़ाई में आशा प्रदान करता है, जिससे संभावित रूप से हर साल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि सर्विकल कैंसर महिलाओं में होने वाला चौथा प्रमुख कैंसर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2022 में लगभग 6 लाख 60 हजार कैंसर के नए मामले सामने आए और 3 लाख, 50 हजार मृत्यु कैंसर के कारण हुईं। इस कैंसर का प्राथमिक कारक ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से ग्रस्त होना है। अवश्य इस शोध के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रोग की समय पर पहचान सुनिश्चित कर उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार, शोध अधिष्ठाता प्रो. पवन कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी एंड एप्लाइड साइंसेज (एसआईएएस) के डीन प्रो. दिनेश कुमार गुप्ता, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. संजीव कुमार, प्रो. नीलम सिंह सांगवान, प्रो. सुरेंद्र सिंह, और जैव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अंतरेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के अन्य संकाय सदस्यों ने इस परियोजना के लिए डाॅ. नीलम को बधाई दी।
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