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गुरु तेगबहादुर भारतीय बलिदानी परंपरा के जीवंत हस्ताक्षर हैं : डॉ. संजय
Tue, 04 Nov 2025 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 04 Nov 2025 11:54 PM IST
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फोटो 02 श्रेष्ठ कहानी सुनाने वाले बच्चों को सम्मानित करते विशिष्ठ अतिथि जसवंत सिंह। प्रवक्
नारनौल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अकबरपुर में श्री गुरु तेगबहादुर के जीवन और बलिदान पर आधारित विद्यालय स्तरीय कहानी वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राचार्या सीमा यादव और विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य जसवंत सिंह ने गुरु तेगबहादुर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया।
सीमा यादव ने कहा कि गुरु तेगबहादुर ने प्राणों की आहुति देकर धार्मिक स्वतंत्रता, मानवता और सत्य के लिए जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह युगों तक प्रेरणा देता रहेगा। मुख्य वक्ता डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर भारतीय बलिदानी परंपरा के जीवंत हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने धर्म और नैतिकता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
उन्होंने गुरु जी के तीनों शिष्यों भाई मतिदास, भाई सती दास और भाई दयाला के अद्वितीय बलिदानों के प्रसंग सुनाए। जिनकी वीरता और अटूट निष्ठा ने सबके हृदयों को भावविभोर कर दिया। जसवंत सिंह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर का जीवन त्याग, साहस और सहिष्णुता का प्रतीक है, जो आज भी समाज को एकता और मानवता का संदेश देता है। महेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर को हिंद की चादर कहा जाता है।
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सीमा यादव ने कहा कि गुरु तेगबहादुर ने प्राणों की आहुति देकर धार्मिक स्वतंत्रता, मानवता और सत्य के लिए जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह युगों तक प्रेरणा देता रहेगा। मुख्य वक्ता डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर भारतीय बलिदानी परंपरा के जीवंत हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने धर्म और नैतिकता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
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उन्होंने गुरु जी के तीनों शिष्यों भाई मतिदास, भाई सती दास और भाई दयाला के अद्वितीय बलिदानों के प्रसंग सुनाए। जिनकी वीरता और अटूट निष्ठा ने सबके हृदयों को भावविभोर कर दिया। जसवंत सिंह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर का जीवन त्याग, साहस और सहिष्णुता का प्रतीक है, जो आज भी समाज को एकता और मानवता का संदेश देता है। महेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर को हिंद की चादर कहा जाता है।
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