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Mahendragarh-Narnaul News: अदालत के आदेश पर अवैध हिरासत के आरोप में एएसआई समेत दो पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज
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महेंद्रगढ़। शहर थाना पुलिस के एएसआई जयकिशन समेत दो कर्मचारियों पर एक व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एसडीजेएम महेंद्रगढ़ के आदेश पर हुई है। मारपीट, अवैध कारावास, लोक सेवक द्वारा कानून के उल्लंघन और आपराधिक धमकी की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है।
शिकायतकर्ता आशा यादव के अनुसार, उनके पति दीपक को जयकिशन ने स्कूटी के दस्तावेज जांचने के बहाने बुलाया। इसके बाद रेलवे लाइन के पास से उसे पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले गया। आशा का आरोप है कि वह अपनी दो माह की बच्ची के साथ थाने पहुंची लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया। बाद में एक परिचित ने दीपक को थाने के कमरे में बंद देखा।
पुलिस ने अदालत में क्या कहा
पुलिस ने अदालत को बताया कि 17 सितंबर को बालाजी चौक पर स्कूटी और मोटरसाइकिल की टक्कर को लेकर विवाद हुआ था। शांति भंग की आशंका में दीपक और उसके साथी रोहित को हिरासत में लिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार रोहित को रात में छोड़ दिया गया जबकि दीपक थाने में ही रहा।
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गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया कानून के अनुरूप नहीं
अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में गिरफ्तारी का आधार बताने और परिजनों को सूचना देने का जिक्र नहीं है। दीपक ने अदालत में पुलिसकर्मियों पर मारपीट और कपड़े उतारकर पीटने का आरोप लगाया। वहीं सीआईए कर्मचारी उज्ज्वल ने मारपीट से इन्कार किया। अदालत ने पुलिस के बयानों में विरोधाभास का भी उल्लेख किया। प्रथम दृष्टया गिरफ्तारी और हिरासत को कानून के अनुरूप न पाते हुए अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। एसपी को जांच की निगरानी करने और डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के लिए भी कहा गया है।
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शिकायतकर्ता आशा यादव के अनुसार, उनके पति दीपक को जयकिशन ने स्कूटी के दस्तावेज जांचने के बहाने बुलाया। इसके बाद रेलवे लाइन के पास से उसे पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले गया। आशा का आरोप है कि वह अपनी दो माह की बच्ची के साथ थाने पहुंची लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया। बाद में एक परिचित ने दीपक को थाने के कमरे में बंद देखा।
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पुलिस ने अदालत में क्या कहा
पुलिस ने अदालत को बताया कि 17 सितंबर को बालाजी चौक पर स्कूटी और मोटरसाइकिल की टक्कर को लेकर विवाद हुआ था। शांति भंग की आशंका में दीपक और उसके साथी रोहित को हिरासत में लिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार रोहित को रात में छोड़ दिया गया जबकि दीपक थाने में ही रहा।
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गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया कानून के अनुरूप नहीं
अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में गिरफ्तारी का आधार बताने और परिजनों को सूचना देने का जिक्र नहीं है। दीपक ने अदालत में पुलिसकर्मियों पर मारपीट और कपड़े उतारकर पीटने का आरोप लगाया। वहीं सीआईए कर्मचारी उज्ज्वल ने मारपीट से इन्कार किया। अदालत ने पुलिस के बयानों में विरोधाभास का भी उल्लेख किया। प्रथम दृष्टया गिरफ्तारी और हिरासत को कानून के अनुरूप न पाते हुए अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। एसपी को जांच की निगरानी करने और डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के लिए भी कहा गया है।