फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Farmers had to sweat to get DAP fertilizer

Mahendragarh-Narnaul News: डीएपी खाद लेने के लिए किसानों को बहाना पड़ा पसीना

Tue, 17 Sep 2024 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 17 Sep 2024 12:34 AM IST
विज्ञापन
Farmers had to sweat to get DAP fertilizer
महेंद्रगढ़। डीएपी खाद लेने के लिए अनाज मंडी में स्थित सरकारी खाद केंद्र पर किसानों की लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई हैं। सोमवार को डीएपी खाद लेने को लेकर किसानों की मारामारी रही। रेलवे रोड पर स्थित सरकारी खाद केंद्र पर सुबह से खाद लेने के लिए महिला-पुरुष किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह सात बजे से ही किसान लाइनों में लग गए। सोसाइटी के कर्मचारियों के सहयोग से शांतिपूर्वक खाद का वितरण किया गया।
विज्ञापन


डीएपी खाद के पहुंचे 1300 बैग
हैफड के मैनेजर जगराम ने बताया कि रविवार देर शाम को सरकारी खाद केंद्र पर 1300 बैग पहुंचे थे, जिसमें से 800 बैग किसानों को दे दिए हैं। अभी 500 बैग अभी गोदाम में शेष हैं जो मंगलवार को किसानों को वितरित किए जाएंगे। वहीं 800 बैग की गाड़ी रविवार शाम को पहुंची थी, 500 बैग की गाड़ी सुबह पहुंच गई थी। सोमवार को सुबह से ही किसानों को वितरित करना शुरू कर दिया है। शाम 5 बजे किसानों को वितरित किया गया। सोमवार शाम को 500 डीएपी खाद के बैग की गाड़ी गोदाम में पहुंच चुकी है। इसे मंगलवार को वितरित किया जाएगा। एक किसान को पांच डीएपी खाद के बैग दिए जा रहे हैं। किसानों को खाद को लेकर किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।
विज्ञापन


सुबह सात बजे गांव पालड़ी-पनिहारा से डीएपी खाद लेने के लिए पहुंचा था, लेकिन यहां पहले से लाइनें लगी हुई थीं। बड़ी जद्दोजहद के बाद खाद मिल पाई। हर बार जरूरत के समय लाइनों में लगना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- महेंद्र सिंह, किसान, पालडी पनिहारा

जब भी किसानों को खाद की आवश्यक होती है तो यही समस्या आती है। अब किसान दिनभर खेतों में काम करे या खाद के लिए लाइनों में लगे। पिछले दो-तीन सालों से खाद को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है।
रामेश्वर, किसान, खायरा

हर बार होते हैं पर्याप्त खाद के दावे लेकिन धरातल पर किसानों को धक्के ही खाने पड़ते हैं। जब यूरिया खाद की आवश्यकता होती है तो उसकी कमी पड़ जाती है। जिम्मेदारों की ओर से सीजन से पूर्व तैयारी नहीं की जाती जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

- रामस्वरूप, किसान, मालड़ा बास

जरूरत के समय हर बार यही स्थिति बनती है। लेकिन जिम्मेदार किसानों की परेशानी के बावजूद भी कोई सबक नहीं लेते। वितरण के पहले ही दिन व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई। अभी पूरा सीजन शेष है। ऐसे में किसानों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं करनी चाहिए।
-रामनिवास, किसान, महेंद्रगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed