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Mahendragarh-Narnaul News: किसान दे रहे मूंगफली की जैविक खेती को बढ़ावा, 35 एकड़ में हो रही खेती
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फोटो नंबर- 19 मूंगफली की फसल दिखाती महिला किसान। संवाद
मंडी अटेली। क्षेत्र में किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर जैविक मूंगफली की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों को इस खेती में गेहूं और बाजरे से अधिक मुनाफा होने की उम्मीद है। वर्तमान में लगभग 35 एकड़ भूमि में जैविक मूंगफली की बिजाई की गई है।
खेतों में फसल की अच्छी बढ़वार देखकर किसानों में उत्साह है। प्रमोद कुमार, निहाल सिंह, राजेश कुमार, जितेंद्र कुमार और कर्मबीर सिंह जैसे किसान पहली बार जैविक मूंगफली उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
इसके बजाय गोबर की खाद और जैविक दवाइयों का प्रयोग हो रहा है। किसानों का कहना है कि कटाई के बाद ही वास्तविक खर्च और मुनाफा पता चलेगा। हालांकि, फसल की मौजूदा स्थिति बहुत अच्छी दिख रही है।
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एक एकड़ भूमि के लिए 6 हजार रुपये का बीज खरीदकर मूंगफली की जैविक बिजाई की है। फसल में जरूरत के अनुसार पानी की सिंचाई की जा रही है। जैविक खेती से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और लागत भी कम आती है। फिलहाल फसल अच्छी चल रही है लेकिन इसका लाभ व फायदा पूरी फसल की कटाई के बाद ही पता चल पाएगा।-प्रमोद कुमार, किसान, गांव बिहाली
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जैविक खेती में लागत कम है और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित नहीं होती। गेहूं व बाजरा की खेती गत तीन साल से जैविक तरीके से कर रहा हूं। इस बार मूंगफली की भी बिजाई जैविक खेती के अनुसार की है और बेहतर पैदावार व मुनाफे की उम्मीद है।-निहाल सिंह, किसान, गांव बिहाली
वर्जन:
क्षेत्र के किसान जैविक खेती को अपना रहे हैं जिससे उन्हें लाभ भी प्राप्त हो रहा है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है। साथ ही जैविक खेती फसल चक्र के लिए भी उपयोगी है।-रजनीश कुमार, खंड कृषि अधिकारी, अटेली।
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खेतों में फसल की अच्छी बढ़वार देखकर किसानों में उत्साह है। प्रमोद कुमार, निहाल सिंह, राजेश कुमार, जितेंद्र कुमार और कर्मबीर सिंह जैसे किसान पहली बार जैविक मूंगफली उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
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इसके बजाय गोबर की खाद और जैविक दवाइयों का प्रयोग हो रहा है। किसानों का कहना है कि कटाई के बाद ही वास्तविक खर्च और मुनाफा पता चलेगा। हालांकि, फसल की मौजूदा स्थिति बहुत अच्छी दिख रही है।
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एक एकड़ भूमि के लिए 6 हजार रुपये का बीज खरीदकर मूंगफली की जैविक बिजाई की है। फसल में जरूरत के अनुसार पानी की सिंचाई की जा रही है। जैविक खेती से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और लागत भी कम आती है। फिलहाल फसल अच्छी चल रही है लेकिन इसका लाभ व फायदा पूरी फसल की कटाई के बाद ही पता चल पाएगा।-प्रमोद कुमार, किसान, गांव बिहाली
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जैविक खेती में लागत कम है और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित नहीं होती। गेहूं व बाजरा की खेती गत तीन साल से जैविक तरीके से कर रहा हूं। इस बार मूंगफली की भी बिजाई जैविक खेती के अनुसार की है और बेहतर पैदावार व मुनाफे की उम्मीद है।-निहाल सिंह, किसान, गांव बिहाली
वर्जन:
क्षेत्र के किसान जैविक खेती को अपना रहे हैं जिससे उन्हें लाभ भी प्राप्त हो रहा है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है। साथ ही जैविक खेती फसल चक्र के लिए भी उपयोगी है।-रजनीश कुमार, खंड कृषि अधिकारी, अटेली।