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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि में विशेषज्ञ समझा रहे शिक्षण में तकनीकि का प्रयोग

Tue, 22 Oct 2024 01:47 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 22 Oct 2024 01:47 AM IST
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Experts in Hakenvi are explaining the use of technology in teaching.
फोटो संख्या:60- हकेंवि में आयोजित दक्षता विकास कार्यक्रम में उप​स्थित विशेषज्ञ, शिक्षक एवं प्रत
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में आयोजित दक्षता विकास कार्यक्रम में प्रतिभागियों को शिक्षण में तकनीकि का प्रयोग विशेषज्ञ समझा रहे हैं। इसमें चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू), सिरसा के प्रो. विक्रम सिंह व महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक के पुस्तकालय विभाग के प्रो. निर्मल सिंह विशेषज्ञ वक्ता के रूप में मौजूद रहे। हकेंवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि इस दक्षता विकास कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ प्रतिभागियों को शिक्षण दक्षता व टेक्नोलोजी और साफ्टवेयर का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर रहे है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागी इस आयोजन से लाभान्वित होंगे।
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कार्यक्रम के पांचवें दिन की शुरुआत में विशेषज्ञों का स्वागत कार्यक्रम के संयोजक डाॅ. प्रवीण, डाॅ. कुमार पी ने किया। आयोजन में विशेषज्ञ प्रो. विक्रम सिंह ने कहा कि आज समय आंकड़ों का है। अगर हमें टेक्नोलॉजी और साफ्टवेयर का सही व सटीक प्रयोग करना आ गया तो फिर हम निश्चित रूप से आगे बढ़ने में सफल होंगे। तकनीक प्रयोग करते हुए अपनी निजी जानकारी कही पर भी शेयर नहीं करनी चाहिए और हमें विभिन्न लाॅगइन आईडी के लिए एक ही पासवर्ड व इमेल प्रयोग नहीं करना चाहिए। कम्प्यूटर, लैपटाॅप का प्रयोग करते हुए हाेक्सवेयर वार्निंग वायरस अलर्ट, रैनसैमवेयर, होक्सवेयर, फिशिंग मेल आदि से बचना होगा। हमें डिजिटल लिटरेट होना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक का प्रयोग करते समय हमें फेक कंटेट, फेक डाटा से बचना होगा।
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प्रो. निर्मल कुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज का समय ई-रिसोर्स का है। इसको हम कभी भी कही भी प्रयोग कर सकते है। उन्होंने भारत सरकार के डिजिटल लाइब्रेरी, मूक, स्वयप्रभा, सीइसी, ज्ञान दर्शन आदि के बारे में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मूक के माध्यम से हमें पर्याप्त विविधता मिलती है और नई शिक्षा नीति का भी यही लक्ष्य है।
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