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मुरादाबाद में ही पूर्व शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा एवं उनके 61 साथियों को पुलिस ने कर लिया था गिरफ्तार

Tue, 04 Aug 2020 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 01:42 AM IST
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ex minister rambilas arested by polive in muradabad
फोटो संख्या:64- पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा - फोटो : Narnol
महेंद्रगढ़। पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी जाएगी। इस नींव रखे जाने से करोड़ों राम भक्तों का सपना साकार होगा। हिंदू धर्म के करोड़ों लोगों एवं कार सेवकों ने इस दिन के लिए संघर्ष किया है तथा यातनाएं सहीं हैं। इस संघर्ष में जिले से 62 लोगों ने कारसेवकों के रूप में भाग लिया था। जिसका नेतृत्व पूर्व शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने किया था। सभी ने माथे पर तिलक लगाकर और हाथ में भगवा झंडा लेकर तथा जय श्रीराम के उद्घोष लगाकर अयोध्या के लिए रवाना हुए थे।
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प्रो. रामबिलास शर्मा ने बताया कि 25 अक्तूबर को महेंद्रगढ़ से 62 लोगों ने अयोध्या के लिए कूच किया था। सभी महेंद्रगढ़ से ट्रेन में गए थे और दिल्ली से ट्रेन बदलकर अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। इस पूरी ट्रेन में हिमाचल, राजस्थान तथा हरियाणा के लगभग 1400 कारसेवक थे। उन्होंने बताया कि 26 अक्तूबर को उनको मुरादाबाद रेलवेे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया और बुलंद शहर के डीएवी कॉलेज को जेल बनाया गया था उसमें उनको ले जाया गया। 30 अक्तूबर 1990 को तत्कालीन सरकार ने अयोध्या में लाखों कारसेवकों पर गोलियां चलवा दी। जिसमें कई लोग मारे गए। इससे हालात बहुत बिगड़ गए थे। 31 अक्तूबर को कारसेवकों को पुलिस ने वापस घरों को जाने के लिए रिहा कर दिया था। बिगड़ते हालत को देखकर उन्होंने सेवा रद्द कर दी। इसके बाद उन्होंने वापस घर के लिए प्रस्थान कर लिया था। अभी 62 में से मात्र 32 लोग बचे हैं जो इस कारसेवा यात्रा में शामिल हुए थे
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राम मंदिर के लिए था एक जुनून:
पूर्व शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने बताया कि राम मंदिर के लिए उनमें इतना जुनून था कि 31 अक्तूबर को उनको एवं उनके साथियों को बुलंदशहर डीएवी कॉलेज जेल से रिहा कर दिया गया था लेकिन उसके बाद वो फिर अयोध्या के लिए गाड़ी में बैठ लिए। इस दौरान लखनऊ से 15 किलोमीटर पहले अमौसी गांव में फिर उनको आर्मी के जवानों ने पकड़कर एक क्लीनिक में बंद कर दिया। इस छोटे से क्लीनिक में 150 कारसेवक बंद थे। चारों ओर कर्फ्यू लगा हुआ था। क्लीनिक में न तो उठने की जगह और न ही बैठने की। पास में ही एक मुस्लिम समुदाय की बस्ती थी। बाहर पुलिस घूम रही थी। मुस्लिम लोग उनको देखकर डर रहे थे। ऐसे में पूरी रात भूखे प्यासे और बैठकर निकाली थी। इससे पहले दिन में भी उन्होंने कुछ नहीं खाया था। अगले दिन उनको वहां से जाने के आदेश प्राप्त हो गए तब उन्होंने घर के लिए प्रस्थान किया था। इसके बाद 1991 में लालकृष्ण आडवाणी रथ लेकर हरियाणा में आए थे। वो उस समय प्रदेश अध्यक्ष थे तो उस समय भी प्रदेशवासियों में राम मंदिर के लिए बहुत अधिक जोश देखने को मिला था।
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