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प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए : गोपाल
Sat, 30 Aug 2025 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 30 Aug 2025 11:40 PM IST
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फोटो नंबर-03दसलक्षण पर्व को लेकर अभिषेक करते जैन समाज के लोग। स्रोत-स्वयं
नारनौल। जैन समाज की ओर से तीसरे दिन शनिवार को उत्तम आर्जव धर्म के रूप में दसलक्षण पर्व मनाया गया। पर्व पर सुबह से ही शहर के तीनों मंदिरों में अभिषेक और दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। जैन समाज के पूर्व प्रवक्ता गोपाल जैन ने कहा कि प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए।
श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य विमल जैन को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य मोक्ष जैन और प्रमोद जैन को मिला। पारस बाबा के जयघोष के साथ शांति धारा का उच्चारण कपिल जैन ने करवाया। इसके बाद अष्ट द्रव्य से संगीत, भक्ति एवं आराधना के साथ पूजन कर अर्घ्य चढ़ाए गए।
जैन समाज के पूर्व प्रवक्ता गोपाल जैन ने बताया ऋजोर्भावः इति आर्जव अर्थात आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है, इसलिए प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि जब यह आत्मा मन, वचन, कार्य से संपूर्ण वस्तु से विरक्त होकर अपने आप में रत होता है तब यह जीवात्मा अपने सरल स्वभाव को प्राप्त होकर पर-वस्तु से भिन्न माना जाता है तभी यह सुखी हो जाता है।
मायाचार से युक्त पुरुष प्रायः ऊपर से हितमित वचन बोलता है और सौम्य आकृति बनता है। अपने आचरणों से लोगों का विश्वास उत्पन्न करता है।
इस कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को देर शाम तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में ब्रह्मचारी साधना दीदी ने समाज को उतम मार्दव धर्म के बारे में बताया।
इस अवसर पर राजकुमार जैन,कपिल जैन, नरेश जैन, विजय जैन,अजीत प्रकाश जैन, मनोज जैन, मोक्ष जैन, सुरेंद्र जैन, मनीष जैन, नितिन जैन व शुभम् जैन सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।
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श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य विमल जैन को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य मोक्ष जैन और प्रमोद जैन को मिला। पारस बाबा के जयघोष के साथ शांति धारा का उच्चारण कपिल जैन ने करवाया। इसके बाद अष्ट द्रव्य से संगीत, भक्ति एवं आराधना के साथ पूजन कर अर्घ्य चढ़ाए गए।
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जैन समाज के पूर्व प्रवक्ता गोपाल जैन ने बताया ऋजोर्भावः इति आर्जव अर्थात आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है, इसलिए प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि जब यह आत्मा मन, वचन, कार्य से संपूर्ण वस्तु से विरक्त होकर अपने आप में रत होता है तब यह जीवात्मा अपने सरल स्वभाव को प्राप्त होकर पर-वस्तु से भिन्न माना जाता है तभी यह सुखी हो जाता है।
मायाचार से युक्त पुरुष प्रायः ऊपर से हितमित वचन बोलता है और सौम्य आकृति बनता है। अपने आचरणों से लोगों का विश्वास उत्पन्न करता है।
इस कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को देर शाम तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में ब्रह्मचारी साधना दीदी ने समाज को उतम मार्दव धर्म के बारे में बताया।
इस अवसर पर राजकुमार जैन,कपिल जैन, नरेश जैन, विजय जैन,अजीत प्रकाश जैन, मनोज जैन, मोक्ष जैन, सुरेंद्र जैन, मनीष जैन, नितिन जैन व शुभम् जैन सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।