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Mahendragarh-Narnaul News: 27 साल बाद भी शहीद का सम्मान अधूरा, पत्नी बोलीं-पति की शहादत पर गर्व, सुविधाओं का अब भी इंतजार
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फोटो नंबर- 10भूतपूर्व कर्नल अशोक चौहान, गांव-कांटी
मंडी अटेली। गांव रामपुरा के शहीद रामसिंह की पत्नी तारावती ने अपने पति की शहादत से जुड़ी भावुक यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सबसे बड़ा सम्मान है और उन्हें अपने पति की शहादत पर हमेशा गर्व रहेगा।
तारावती ने बताया कि 27 साल पहले जब उनके पति का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर आया था, तब उनका बेटा भूदेव केवल 3 साल का था। पति के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बेटे की परवरिश कर उसे पढ़ाया-लिखाया। आज भूदेव अपने काम में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शहीद परिवारों को गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है लेकिन उनके परिवार को अब तक इसका लाभ नहीं मिला।
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शहीद के बेटे भूदेव ने कहा कि अगर उसे भारतीय सेना में सेवा करने का मौका मिला तो वह अपने पिता का अधूरा सपना पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि पिता की शहादत ने उनके मन में देशसेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत किया है।
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अटेली सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें लगभग 3000 से अधिक पूर्व सैनिक है लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते यहां सैनिकों को परेशानियों कारण सामना करना पड़ता है। लंबे समय से सीएसडी की मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।-पूर्व मेजर बलबीर सिंह, गांव बिहाली
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सरकार को सैनिकों की सुविधा के लिए अस्पताल व कैंटीन की व्यवस्था करनी चाहिए लेकिन कई सालों से लगातार मांग व पत्राचार करने के बावजूद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा जो एक चिंता का विषय है।-पूर्व कर्नल अशोक चौहान, गांव कांटी
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मेरे पिता ने 1971 की लड़ाई में दुश्मनों को धूल चटाई, उनकी बहादुरी के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया था जिसने मुझे भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। -पूर्व लेफ्टिनेंट सुमेर सिंह, गांव बिहाली
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तारावती ने बताया कि 27 साल पहले जब उनके पति का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर आया था, तब उनका बेटा भूदेव केवल 3 साल का था। पति के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बेटे की परवरिश कर उसे पढ़ाया-लिखाया। आज भूदेव अपने काम में व्यस्त है।
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उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शहीद परिवारों को गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है लेकिन उनके परिवार को अब तक इसका लाभ नहीं मिला।
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शहीद के बेटे भूदेव ने कहा कि अगर उसे भारतीय सेना में सेवा करने का मौका मिला तो वह अपने पिता का अधूरा सपना पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि पिता की शहादत ने उनके मन में देशसेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत किया है।
अटेली सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें लगभग 3000 से अधिक पूर्व सैनिक है लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते यहां सैनिकों को परेशानियों कारण सामना करना पड़ता है। लंबे समय से सीएसडी की मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।-पूर्व मेजर बलबीर सिंह, गांव बिहाली
सरकार को सैनिकों की सुविधा के लिए अस्पताल व कैंटीन की व्यवस्था करनी चाहिए लेकिन कई सालों से लगातार मांग व पत्राचार करने के बावजूद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा जो एक चिंता का विषय है।-पूर्व कर्नल अशोक चौहान, गांव कांटी
मेरे पिता ने 1971 की लड़ाई में दुश्मनों को धूल चटाई, उनकी बहादुरी के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया था जिसने मुझे भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। -पूर्व लेफ्टिनेंट सुमेर सिंह, गांव बिहाली