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सपना : सिलाई कर खुद का बड़ा बुटीक व बच्चों को बनाना है कामयाब
Sat, 15 Nov 2025 11:14 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 15 Nov 2025 11:14 PM IST
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फोटो 01 सिलाई मशीन पर काम करती हुई सुमन। संवाद
नारनौल। वो कहते हैं न कि हाथ का हुनर कभी बेकार नहीं जाता। इसी का जीता जागता उदाहरण शिव कॉलोनी में देखने को मिला। जहां बचपन में शौक के चलते सुमन ने खुद से घर पर ही सिलाई का काम सीखा लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि उनका ये हुनर ही एक दिन उसके इतना काम आएगा। आज इसी हुनर के चलते सुमन किराए के मकान में अपना छोटा सा बुटीक चला रहीं हैं और खुद और बच्चों को कामयाब बनाने में जुटी हुईं हैं।
1987 में राजस्थान के टीबाबसई में एक साधारण से परिवार में जन्मी सुमन को बचपन से सिलाई का शौक था। अपने इसी शौक के चलते सुमन कुछ न कुछ बुनाई करती थीं और धीरे धीरे इसमें पारंगत हो गई। सुमन ने 10वीं तक की पढ़ाई की है। वर्ष 2005 में कनीना क्षेत्र के बेवल गांव में उनकी शादी हो गई।
10 साल तक रही गांव में:
सुमन 10 सालों तक अपने ससुराल में ही रहीं और 2015 में बच्चों की पढ़ाई के चलते नारनौल आ गई। यहां शिव कॉलोनी में किराए के मकान में रह रही हैं और पति भी शहर के बाहर आजीविका कमा रहे हैं। ऐसे घर खर्च चलाने में मुश्किल होने के चलते 2021 में सुमन का सिलाई मशीन ने ही साथ दिया।
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छोटे से स्टोर में बनाया बुटीक
सुमन के हाथ की सफाई देखकर अब खासी महिलाएं उनसे कपड़े सिलवाने आती हैं। ऐसे में 4 सालों की मेहनत के बाद सुमन की महिने में 20 से 25 हजार की आमदनी भी हो जाती है। काम बढ़ता देख एक लड़की को भी अपने यहां रोजगार दिया। इसके अलावा सुमन अब तक 6 लड़कियों को मुफ्त में सिलाई का काम सीखा चुकी हैं।
बहन की बेटी का जिम्मा भी सुमन पर
सुमन की एक बेटी है, जो बीटेक कर रही हैं। इसके अलावा बहन की बेटी भी उन्हीं के पास रहती है और उसे भी अपनी बेटी की तरह ही पाल रहीं हैँ। सुमन ने बताया कि उनका बस एक ही सपना है कि उसकी दोनों बेटियां कामयाब हों और शहर में उसका खुद का एक बड़ा बुटीक हो ताकि वह पूर्णतया आत्मनिर्भर हो सकें।
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1987 में राजस्थान के टीबाबसई में एक साधारण से परिवार में जन्मी सुमन को बचपन से सिलाई का शौक था। अपने इसी शौक के चलते सुमन कुछ न कुछ बुनाई करती थीं और धीरे धीरे इसमें पारंगत हो गई। सुमन ने 10वीं तक की पढ़ाई की है। वर्ष 2005 में कनीना क्षेत्र के बेवल गांव में उनकी शादी हो गई।
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10 साल तक रही गांव में:
सुमन 10 सालों तक अपने ससुराल में ही रहीं और 2015 में बच्चों की पढ़ाई के चलते नारनौल आ गई। यहां शिव कॉलोनी में किराए के मकान में रह रही हैं और पति भी शहर के बाहर आजीविका कमा रहे हैं। ऐसे घर खर्च चलाने में मुश्किल होने के चलते 2021 में सुमन का सिलाई मशीन ने ही साथ दिया।
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छोटे से स्टोर में बनाया बुटीक
सुमन के हाथ की सफाई देखकर अब खासी महिलाएं उनसे कपड़े सिलवाने आती हैं। ऐसे में 4 सालों की मेहनत के बाद सुमन की महिने में 20 से 25 हजार की आमदनी भी हो जाती है। काम बढ़ता देख एक लड़की को भी अपने यहां रोजगार दिया। इसके अलावा सुमन अब तक 6 लड़कियों को मुफ्त में सिलाई का काम सीखा चुकी हैं।
बहन की बेटी का जिम्मा भी सुमन पर
सुमन की एक बेटी है, जो बीटेक कर रही हैं। इसके अलावा बहन की बेटी भी उन्हीं के पास रहती है और उसे भी अपनी बेटी की तरह ही पाल रहीं हैँ। सुमन ने बताया कि उनका बस एक ही सपना है कि उसकी दोनों बेटियां कामयाब हों और शहर में उसका खुद का एक बड़ा बुटीक हो ताकि वह पूर्णतया आत्मनिर्भर हो सकें।