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Mahendragarh-Narnaul News: कमोई और सराय के कुंभकारों के लिए दिवाली बनी कमाई की उम्मीद
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फोटो संख्या:55- महेंद्रगढ़ में मिट्टी के दिये तैयार करते कारीगर--संवाद
महेंद्रगढ़। दिवाली नजदीक आते ही महेंद्रगढ़ और आसपास के इलाकों में कुंभकारों के चाक तेजी से घूम रहे हैं। कमोई और सराय क्षेत्र में करीब 25 घरों के लोग इस पुश्तैनी काम से जुड़े हैं। इस बार करीब 30 कुंभकारों ने 2.50 लाख दीये बनाने का लक्ष्य रखा है जिनमें से लगभग 80 हजार तैयार हो चुके हैं।
कुंभकार प्रदीप और विकास ने बताया कि दीये बनाने का काम तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था। मिट्टी लाने के लिए उन्हें झज्जर, चरखी दादरी और राजस्थान तक जाना पड़ता है। फिर मिट्टी को भिगोकर तैयार किया जाता है, चाक पर दीये बनते हैं, उन्हें सुखाया जाता है और तब जाकर वे बिक्री लायक होते हैं। त्योहार पर काम बढ़ने से परिवार के सदस्य भी हाथ बंटाते हैं।
रोज बन रहे 1500 दीये, डिजाइनदार की भी मांग
हर दिन करीब 1500 दीये तैयार हो रहे हैं। सामान्य दीयों के साथ डिजाइनदार दीये भी बनाए जा रहे हैं, जिनकी कीमत करीब 20 रुपये तक है। महंगाई के कारण छोटा दीया, जो पिछले साल 1 रुपये का था, अब 2 रुपये में बिक रहा है। सराय 10 रुपये और कमोई 30 रुपये तक बिक रही है।
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गुरुग्राम और दादरी तक पहुंच रही रोशनी
महेंद्रगढ़ के दीये बाजार के साथ गुरुग्राम और चरखी दादरी तक भेजे जाते हैं। एक ट्रॉली दीयों की कीमत करीब आठ हजार रुपये बताई गई है। कारीगरों को उम्मीद है कि एक व्यक्ति इस सीजन में करीब 50 हजार रुपये तक कमा सकता है, हालांकि असली कमाई बिक्री, लागत और मांग पर निर्भर करेगी।
परंपरा को सहारा देने की अपील
बिजली की झालरों और सजावटी सामान के बावजूद मिट्टी के दीयों की मांग बनी हुई है। कुंभकारों को आस है कि लोग इस दिवाली मिट्टी के दीये खरीदकर उनकी मेहनत और पुरानी कला को बढ़ावा देंगे।
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कुंभकार प्रदीप और विकास ने बताया कि दीये बनाने का काम तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था। मिट्टी लाने के लिए उन्हें झज्जर, चरखी दादरी और राजस्थान तक जाना पड़ता है। फिर मिट्टी को भिगोकर तैयार किया जाता है, चाक पर दीये बनते हैं, उन्हें सुखाया जाता है और तब जाकर वे बिक्री लायक होते हैं। त्योहार पर काम बढ़ने से परिवार के सदस्य भी हाथ बंटाते हैं।
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रोज बन रहे 1500 दीये, डिजाइनदार की भी मांग
हर दिन करीब 1500 दीये तैयार हो रहे हैं। सामान्य दीयों के साथ डिजाइनदार दीये भी बनाए जा रहे हैं, जिनकी कीमत करीब 20 रुपये तक है। महंगाई के कारण छोटा दीया, जो पिछले साल 1 रुपये का था, अब 2 रुपये में बिक रहा है। सराय 10 रुपये और कमोई 30 रुपये तक बिक रही है।
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गुरुग्राम और दादरी तक पहुंच रही रोशनी
महेंद्रगढ़ के दीये बाजार के साथ गुरुग्राम और चरखी दादरी तक भेजे जाते हैं। एक ट्रॉली दीयों की कीमत करीब आठ हजार रुपये बताई गई है। कारीगरों को उम्मीद है कि एक व्यक्ति इस सीजन में करीब 50 हजार रुपये तक कमा सकता है, हालांकि असली कमाई बिक्री, लागत और मांग पर निर्भर करेगी।
परंपरा को सहारा देने की अपील
बिजली की झालरों और सजावटी सामान के बावजूद मिट्टी के दीयों की मांग बनी हुई है। कुंभकारों को आस है कि लोग इस दिवाली मिट्टी के दीये खरीदकर उनकी मेहनत और पुरानी कला को बढ़ावा देंगे।

फोटो संख्या:55- महेंद्रगढ़ में मिट्टी के दिये तैयार करते कारीगर--संवाद

फोटो संख्या:55- महेंद्रगढ़ में मिट्टी के दिये तैयार करते कारीगर--संवाद

फोटो संख्या:55- महेंद्रगढ़ में मिट्टी के दिये तैयार करते कारीगर--संवाद