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विज्ञानोत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 75 गौरवशाली वर्षों पर की चर्चा
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में मौलिक विज्ञान पीठ ने गणित विभाग के सहयोग से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर विज्ञानोत्सव प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में अर्पित दुबे व टीम को मास्क डिटेक्टिंग ऑटोमेटिक डोर में प्रथम पुरस्कार, अक्षतकांत की टीम को ड्यूल फ्यूज्ड डिपोजिशन मॉडलिंग (एफडीएम) 3डी प्रिंटर में द्वितीय, विजयन शर्मा, टीम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट के लिए तृतीय पुरस्कार, धनराज, टीम को नेत्र संचालित स्मार्ट व्हील चेयर के लिए प्रथम सांत्वना पुरस्कार मिला और डिक्स पटेल और टीम को अंतरिक्ष में लेजर संचार के लिए दूसरा सांत्वना पुरस्कार मिला। कुलपति ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
कुलपति ने स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए विकास की चर्चा की। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के पूर्व आचार्य प्रो. पीके अहलुवालिया, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. डीके चतुर्वेदी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. गुंजन गोयल ने प्रो. पीके अहलुवालिया का परिचय प्रस्तुत किया।
प्रो. अहलुवालिया ने भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 75 गौरवशाली वर्ष के बारे में चर्चा की। प्रख्यात वैज्ञानिकों के बारे में लघु कथाएं सुनाकर प्रतिभागियों को प्रेरित किया। इसी क्रम में डॉ. जसवंत सिंह ने प्रो. डी. के. चतुर्वेदी का परिचय प्रतिभागियों से कराया। उन्होंने भारतीय विज्ञान की समीक्षा के बारे में चर्चा करते हुए भारतीय वैज्ञानिकों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीके के बारे में बात की। इस दौरान नोडल अधिकारी प्रो. सारिका शर्मा, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सुनील कुमार समेत करीब 200 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।
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कुलपति ने स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए विकास की चर्चा की। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के पूर्व आचार्य प्रो. पीके अहलुवालिया, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. डीके चतुर्वेदी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
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डॉ. गुंजन गोयल ने प्रो. पीके अहलुवालिया का परिचय प्रस्तुत किया।
प्रो. अहलुवालिया ने भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 75 गौरवशाली वर्ष के बारे में चर्चा की। प्रख्यात वैज्ञानिकों के बारे में लघु कथाएं सुनाकर प्रतिभागियों को प्रेरित किया। इसी क्रम में डॉ. जसवंत सिंह ने प्रो. डी. के. चतुर्वेदी का परिचय प्रतिभागियों से कराया। उन्होंने भारतीय विज्ञान की समीक्षा के बारे में चर्चा करते हुए भारतीय वैज्ञानिकों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीके के बारे में बात की। इस दौरान नोडल अधिकारी प्रो. सारिका शर्मा, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सुनील कुमार समेत करीब 200 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।
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