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Mahendragarh-Narnaul News: सावन में आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम बना ढोसी धाम

Sun, 02 Aug 2026 11:46 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:46 PM IST
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Dhosi Dham becomes a magnificent confluence of faith and nature during the month of Sawan.
फोटो नंबर-05ढोसी धाम की चढ़ाई के दौरान बैठे ग्रुप के सदस्य। संवाद
नारनौल। सावन शुरू होते ही शहर से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित महर्षि च्यवन की तपोस्थली ढोसी धाम श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा स्थल बन गया है। बारिश के मौसम में पहाड़ों से गिरते झरने, चारों ओर फैली हरियाली और बादलों से घिरी पहाड़ियां यहां आने वालों का मन मोह लेती हैं।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, यही वह स्थान है जहां महर्षि च्यवन ने तपस्या की थी। माना जाता है कि च्यवनप्राश की पहचान भी इसी तपोस्थली से जुड़ी है। सावन के महीने में यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
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ढोसी धाम की पहचान बढ़ाने के लिए जय भोले ग्रुप सात वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है। करीब 50 सदस्यों वाले इस ग्रुप में युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। सभी सदस्य रोज सुबह पांच बजे पहुंचकर करीब पांच किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ते हैं, चंद्रकूप में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और फिर यहां की प्राकृतिक सुंदरता को मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं।
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ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि उनके वीडियो देखकर बड़ी संख्या में लोग ढोसी धाम घूमने पहुंच रहे हैं। उनका उद्देश्य इस धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने की दिशा में लोगों और सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
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जय भोले ग्रुप सावन के पूरे माह रोज ढोसी पर्वत की चढ़ाई करता है। मेरी उम्र 72 वर्ष है लेकिन आज भी इस पर्वत पर चढ़ने के बाद थकान नहीं, बल्कि नई ऊर्जा का अनुभव होता है। सबसे बड़ा सौभाग्य यह है कि चंद्रकूप पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का अवसर भी मिलता है। यही अनुभव हर दिन यहां आने की प्रेरणा देता है।-अमरनाथ सोनी, सदस्य जय भोले ग्रुप

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सावन में यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ हमारा उद्देश्य इस पवित्र और ऐतिहासिक धाम का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना भी है। सतयुग से जुड़ी इस धरोहर की जानकारी लोगों तक पहुंचे, इसलिए हम इसकी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। -सुभाष अग्रवाल, संयोजक जय भोले ग्रुप
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