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बुढ़ापा पेंशन पर बच्चों की आय को मापदंड बनाने का फैसला सम्मान पर सीधा हमला : राव नरेंद्र

Wed, 11 Feb 2026 11:30 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:30 PM IST
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Decision to make children's income a criterion for old age pension a direct attack on dignity: Rao Narendra
फोटो 12हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह।
नारनौल। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने राज्य सरकार के उस फैसले की तीखी निंदा की है, जिसमें बुढ़ापा पेंशन की पात्रता तय करने के लिए बच्चों की आय को आधार बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह संवेदनहीन, जनविरोधी और बुजुर्ग-विरोधी नीति करार दिया है।
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राव नरेंद्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा बुढ़ापा पेंशन कोई सरकार की मेहरबानी नहीं बल्कि बुजुर्गों का संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार है। बुजुर्गों को सम्मान देने और उनकी स्वाभिमानपूर्ण जिंदगी सुनिश्चित करने के लिए यह योजना शुरू की।
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वहीं आज सरकार बच्चों की आय के आधार पर माता-पिता की पेंशन रोकने या काटने की कोशिश कर रही है यह न केवल अमानवीय है बल्कि सामाजिक न्याय, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के अपमान का प्रतीक है।
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उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान दौर में 3-4 लाख रुपये की वार्षिक आय को संपन्नता मानना हास्यास्पद है। जब महंगाई आसमान छू रही है, इलाज के खर्चे भारी पड़ रहे हैं, घरेलू जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है तो ऐसी आय वाले परिवारों को भी पेंशन से वंचित करना सरकार की जन-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।



प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे कठोर, अव्यवहारिक और मनमाने मापदंड लागू कर रही है ताकि हजारों-लाखों बुजुर्गों को इस हक से महरूम किया जा सके।
यह नीति बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन्हें बच्चों पर आश्रित बनाती है जबकि वास्तविकता यह है कि कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं, उनके बच्चे दूर हैं या पारिवारिक सहयोग नहीं मिल पाता।


राव नरेंद्र ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि यह जन-विरोधी शर्त तत्काल वापस ली जाए और सभी पात्र बुजुर्गों को बिना किसी भेदभाव के बुढ़ापा पेंशन प्रदान की जाए ताकि उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा हो सके।
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