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डार्क जोन: सिमटती खेती, उजड़ता किसान
अमर उजाला ब्यूरो/नारनौल
Updated Sat, 24 Oct 2015 12:46 AM IST
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36 साल बीत गए। किसानों को उम्मीद जगी थी कि शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी के निर्माण से टेल तक पानी पहुंचेगा और उनके खेत भी लहलहाएंगे। आज तक न तो अंतिम छोर तक पानी पहुंचा और न ही किसानों की आस पूरी हुई।
देखरेख के अभाव में माइनर भी समतल होने लगी है। सरसों के बड़े उत्पादक क्षेत्र में अब गिरते जलस्तर के कारण बंजर भूमि का रकबा बढ़ रहा है और किसान की नहरी सप्लाई मिलने की उम्मीद भी खत्म हो रही है।
हालांकि सरकार ने टेल तक पानी पहुंचाने पंप हाउसों और नहरों की मरम्त के लिए 143 करोड़ रुपये की जल प्रबंध योजना का शिलान्यास किया है। अब देखना यह है कि सरकार के इस प्रोजेक्ट से किसानों की आस पूरी होती है या नहीं।
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1978 में एलएनडी-1 नारनौल से 23 किमी लंबी शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण करवाया गया था। जमीन एक्वायर एवं निर्माण प्रक्रिया में करीब 1.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। निर्माण के बाद ग्रामीणों को आंशिक सुविधा भी नहीं मिली। नांगल दुर्गू वाटर टैंक से आगे अधिकांश नहर क्षतिग्रस्त हो गई।
ईंट उखड़ने के कारण समतल होनी आरंभ हो गई। विभाग ने शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी नहर से पांच माइनर नहर निकाली थीं। इनमें दोस्तपुर 3.250 किमी, नारनौल 3.277, कमानियां 2.200, मेघोत 2.700, सैदअलिपुर 2.900 किमी लंबी है। निर्माण के बाद माइनरों में एक दिन भी पानी नहीं छोड़ा गया।
दोस्तपुर, सैदअलीपुर, मेघोत हाला की माइनर समतल हो चुकी हैं। शहबाजपुर स्कूल के प्रांगण के बीचोंबीच माइनर निकाली थी। स्कूल प्रशासन ने इस नहर को समतल करवाकर पेड़-पौधे लगवा दिए। जहां नहर का नामोनिशान नहीं रहा, अब ग्रामीणों ने अंतिम छोर तक पानी पहुंचने की उम्मीद छोड़ दी है।
भूजल रिचार्ज की योजना धराशायी
नांगल चौधरी क्षेत्र का भूजल रिचार्ज करने के लिए विभाग ने योजना बनाई थी। दोस्तपुर गांव के आगे माइनर को कसावती नदी में छोड़ा गया ताकि जलभराव होने का फायदा किसानों को मिल सके। किंतु विभाग की लचर व्यवस्था के कारण किसानों का सपना पूरा नहीं हुआ। भूजल सालाना करीब 25 फुट नीचे खिसक रहा है। हजारों फुट गहराई होने के कारण अधिकतर बोरवेल बंद हो गए। इसका प्रभाव फसल उत्पादन पर पड़ रहा है।
गुमराह करके वोट बटोरे गए
रामप्रताप, अजीत कुमार, बीरसिंह, रामचंद्र, बिहारी लाल, मनोज कुमार, विवेक आदि ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के दौरान राजनेताओं को भेदभाव, पेयजल किल्लत, सड़क, बिजली और अन्य समस्याएं दिखाई देती हैं। वोट बटोरने के बाद वायदे भूलकर निजी स्वार्थ को महत्व दिया गया। विभिन्न पार्टियों के उम्मीद्वारों ने मिलजुल जनता को बेवकूफ बनाया है।
सरसों उत्पादन में क्षेत्र अव्वल
अनुकूल जलवायु के कारण प्रदेश में रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले सरसों उत्पादन में होता है। दोनों जिलों में सबसे अधिक योगदान नांगल चौधरी क्षेत्र का है। क्षेत्र के किसान 30-35 मण प्रति एकड़ की पैदावार करते हैं। किंतु भूजल खत्म होने के कारण बंजर भूमि का रकबा बढ़ना शुरू हो गया। सरसों उत्पादन के अभाव में मस्टर्ड ऑयल मंहगा हो जाएगा। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
पानी पहुंचना संभव नहीं, इसलिए नहीं करवाई रिपेयर
क्षतिग्रस्त माइनरों की रिपेयर जानबूझकर नहीं करवाई गई। अधिकारियों का तर्क है कि माइनरों में सप्लाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होगा। इसलिए रिपेयर में बजट खर्च करना उचित नहीं। विभिन्न दबाव के चलते मरम्मत करवा भी जाए तो देखरेख के अभाव में जल्द दोबारा क्षतिग्रस्त हो जाएगी।
रिपेयर का एस्टिमेट भेज दिया
कनिष्ठ अभियंता सतीश कुमार ने बताया कि शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी 20.5 तक दुरुस्त है। इससे आगे खत्म हो चुकी। रिपेयर के लिए उच्चाधिकारियों को एस्टिमेट भेज दिया। बजट मिलने पर मरम्मत कार्य आरंभ हो सकेगा। दोस्तपुर माइनर में पानी पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इसकी रिपेयर के संदर्भ में उच्चाधिकारी बता सकते हैं।
डार्कजोन में नहरी पानी विकल्प
धौलेड़ा निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि डार्कजोन में भूजल स्रोत उपलब्ध नहीं। किसानों की फसल सिंचाई व्यवस्था नहरी पानी पर निर्भर हो गई। सरकार को टेल पर पानी सप्लाई पहुंचानी चाहिए।
- पलायन करने के कगार पर किसान
किसान रामौतार ने बताया कि भूजल के अभाव में खेतीबाड़ी व्यवसाय प्रभावित हो गया। रोजगार के लिए कारखाने भी नहीं। इस कारण किसान पलायन के कगार पर है। सरकार को तुरंत अंतिम छोर पर पानी पहुंचाना होगा।
नहरी पानी नहीं मिलना किसानों का दुर्भाग्य
हरीसिंह ने बताया कि सरकार द्वारा करोड़ों खर्च करके डिस्ट्रीब्यूटरियों का निर्माण करवाया गया था। इनमें महीने में 15 दिन सप्लाई मिलती है। किंतु पानी की मात्रा कम होने के कारण किसानों की मारामारी रहती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलान किसानों का दुर्भाग्य है।
डार्कजोन को नियमित मिले नहरी पानी
विनोद यादव मूलोदी ने बताया कि नांगल चौधरी खंड डार्कजोन घोषित है। नियमानुसार डार्कजोन को नियमित सप्लाई मिलनी चाहिए। राजनीतिक कारणों से किसानों को असुविधा हो रही है। सीएम की घोषणाओं पर जल्द अमल होना चाहिए ताकि किसानों की खेती प्रभावित नहीं हो।
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देखरेख के अभाव में माइनर भी समतल होने लगी है। सरसों के बड़े उत्पादक क्षेत्र में अब गिरते जलस्तर के कारण बंजर भूमि का रकबा बढ़ रहा है और किसान की नहरी सप्लाई मिलने की उम्मीद भी खत्म हो रही है।
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हालांकि सरकार ने टेल तक पानी पहुंचाने पंप हाउसों और नहरों की मरम्त के लिए 143 करोड़ रुपये की जल प्रबंध योजना का शिलान्यास किया है। अब देखना यह है कि सरकार के इस प्रोजेक्ट से किसानों की आस पूरी होती है या नहीं।
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1978 में एलएनडी-1 नारनौल से 23 किमी लंबी शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण करवाया गया था। जमीन एक्वायर एवं निर्माण प्रक्रिया में करीब 1.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। निर्माण के बाद ग्रामीणों को आंशिक सुविधा भी नहीं मिली। नांगल दुर्गू वाटर टैंक से आगे अधिकांश नहर क्षतिग्रस्त हो गई।
ईंट उखड़ने के कारण समतल होनी आरंभ हो गई। विभाग ने शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी नहर से पांच माइनर नहर निकाली थीं। इनमें दोस्तपुर 3.250 किमी, नारनौल 3.277, कमानियां 2.200, मेघोत 2.700, सैदअलिपुर 2.900 किमी लंबी है। निर्माण के बाद माइनरों में एक दिन भी पानी नहीं छोड़ा गया।
दोस्तपुर, सैदअलीपुर, मेघोत हाला की माइनर समतल हो चुकी हैं। शहबाजपुर स्कूल के प्रांगण के बीचोंबीच माइनर निकाली थी। स्कूल प्रशासन ने इस नहर को समतल करवाकर पेड़-पौधे लगवा दिए। जहां नहर का नामोनिशान नहीं रहा, अब ग्रामीणों ने अंतिम छोर तक पानी पहुंचने की उम्मीद छोड़ दी है।
भूजल रिचार्ज की योजना धराशायी
नांगल चौधरी क्षेत्र का भूजल रिचार्ज करने के लिए विभाग ने योजना बनाई थी। दोस्तपुर गांव के आगे माइनर को कसावती नदी में छोड़ा गया ताकि जलभराव होने का फायदा किसानों को मिल सके। किंतु विभाग की लचर व्यवस्था के कारण किसानों का सपना पूरा नहीं हुआ। भूजल सालाना करीब 25 फुट नीचे खिसक रहा है। हजारों फुट गहराई होने के कारण अधिकतर बोरवेल बंद हो गए। इसका प्रभाव फसल उत्पादन पर पड़ रहा है।
गुमराह करके वोट बटोरे गए
रामप्रताप, अजीत कुमार, बीरसिंह, रामचंद्र, बिहारी लाल, मनोज कुमार, विवेक आदि ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के दौरान राजनेताओं को भेदभाव, पेयजल किल्लत, सड़क, बिजली और अन्य समस्याएं दिखाई देती हैं। वोट बटोरने के बाद वायदे भूलकर निजी स्वार्थ को महत्व दिया गया। विभिन्न पार्टियों के उम्मीद्वारों ने मिलजुल जनता को बेवकूफ बनाया है।
सरसों उत्पादन में क्षेत्र अव्वल
अनुकूल जलवायु के कारण प्रदेश में रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले सरसों उत्पादन में होता है। दोनों जिलों में सबसे अधिक योगदान नांगल चौधरी क्षेत्र का है। क्षेत्र के किसान 30-35 मण प्रति एकड़ की पैदावार करते हैं। किंतु भूजल खत्म होने के कारण बंजर भूमि का रकबा बढ़ना शुरू हो गया। सरसों उत्पादन के अभाव में मस्टर्ड ऑयल मंहगा हो जाएगा। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
पानी पहुंचना संभव नहीं, इसलिए नहीं करवाई रिपेयर
क्षतिग्रस्त माइनरों की रिपेयर जानबूझकर नहीं करवाई गई। अधिकारियों का तर्क है कि माइनरों में सप्लाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होगा। इसलिए रिपेयर में बजट खर्च करना उचित नहीं। विभिन्न दबाव के चलते मरम्मत करवा भी जाए तो देखरेख के अभाव में जल्द दोबारा क्षतिग्रस्त हो जाएगी।
रिपेयर का एस्टिमेट भेज दिया
कनिष्ठ अभियंता सतीश कुमार ने बताया कि शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी 20.5 तक दुरुस्त है। इससे आगे खत्म हो चुकी। रिपेयर के लिए उच्चाधिकारियों को एस्टिमेट भेज दिया। बजट मिलने पर मरम्मत कार्य आरंभ हो सकेगा। दोस्तपुर माइनर में पानी पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इसकी रिपेयर के संदर्भ में उच्चाधिकारी बता सकते हैं।
डार्कजोन में नहरी पानी विकल्प
धौलेड़ा निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि डार्कजोन में भूजल स्रोत उपलब्ध नहीं। किसानों की फसल सिंचाई व्यवस्था नहरी पानी पर निर्भर हो गई। सरकार को टेल पर पानी सप्लाई पहुंचानी चाहिए।
- पलायन करने के कगार पर किसान
किसान रामौतार ने बताया कि भूजल के अभाव में खेतीबाड़ी व्यवसाय प्रभावित हो गया। रोजगार के लिए कारखाने भी नहीं। इस कारण किसान पलायन के कगार पर है। सरकार को तुरंत अंतिम छोर पर पानी पहुंचाना होगा।
नहरी पानी नहीं मिलना किसानों का दुर्भाग्य
हरीसिंह ने बताया कि सरकार द्वारा करोड़ों खर्च करके डिस्ट्रीब्यूटरियों का निर्माण करवाया गया था। इनमें महीने में 15 दिन सप्लाई मिलती है। किंतु पानी की मात्रा कम होने के कारण किसानों की मारामारी रहती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलान किसानों का दुर्भाग्य है।
डार्कजोन को नियमित मिले नहरी पानी
विनोद यादव मूलोदी ने बताया कि नांगल चौधरी खंड डार्कजोन घोषित है। नियमानुसार डार्कजोन को नियमित सप्लाई मिलनी चाहिए। राजनीतिक कारणों से किसानों को असुविधा हो रही है। सीएम की घोषणाओं पर जल्द अमल होना चाहिए ताकि किसानों की खेती प्रभावित नहीं हो।