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आज से बजेंगी शहनाई, 15 दिसंबर तक रहेंगे सावे

Fri, 08 Nov 2019 12:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 08 Nov 2019 12:09 AM IST
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शुक्रवार को देव उठनी एकादशी का दिन रहेगा। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने बाद नींद से उठेंगे। साथ ही चतुर्मास का व्रत भी समाप्त हो जाएगा। इसी के साथ विवाह के मुहूर्त शुरू होंगे। 12 जुलाई को देव शयनी एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निंद्रा में चले गए थे और चतुर्मास प्रारंभ हो गया था। इस दौरान कोई भी विवाह-शादी करना शुभ नहीं माना जाता। 8 नवंबर से देव उठ जाएंगे। इसके बाद 15 दिसंबर तक विवाह शादियों के शुभ मुहूर्त रहेंगे। बाद में एक माह के लिए 14 जनवरी 2020 मकर सक्रांति तक तारा डूब जाएगा। 15 जनवरी से विवाह के मुहूर्त शुरू होंगे।
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पंडित रविदत्त ने बताया कि 8 नवंबर के बाद 16 दिसंबर को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश होने तक विवाह के कितने शुभ मुहूर्त और तिथियां हैं। पंचांग की गणना से मालूम होता है कि सूर्य के मीन में आने से पहले ही गुरु 15 दिसंबर को धनु राशि में अस्त हो रहे हैं। इसलिए विवाह की तिथियां 15 दिसंबर से पहले ही समाप्त हो जाएंगी। फिर जनवरी में मकर सक्रांति के बाद विवाह तिथियां का आरंभ होगा। दिवाली के बाद आने वाली एकादशी को पूरे चार महीने बाद भगवान विष्णु जागते हैं, इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं। चार माह तक भगवान सोते हैं। देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान को पूरे विधि-विधान से श्रद्धालु जगाते हैं। दिनभर श्रद्धालु उस दिन उपवास रखते हैं। इन चार महीनों में विवाह व कोई भी मंगल कर्म नहीं किए जाते हैं। देवोत्थान एकादशी को तुलसी विवाह के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। शर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार को देव उठनी एकादशी से सभी देव जाग उठेंगे, इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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तुलसी विवाह की परंपरा
इस साल देव उठनी एकादशी आठ नवंबर को है। इस दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है। भगवान शालिग्राम के साथ तुलसीजी का विवाह होता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें जालंधर को हराने के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा नामक विष्णु भक्त के साथ छल किया था। इसके बाद वृंदा ने विष्णुजी को श्राप देकर पत्थर का बना दिया था, लेकिन लक्ष्मी माता की विनती के बाद उन्हें वापस सही करके सती हो गई थीं। उनकी राख से ही तुलसी के पौधे का जन्म हुआ और उनके साथ शालिग्राम के विवाह का चलन शुरू हुआ।
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आज से मांगलिक कार्यों की शुरुआत
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 8 नवंबर को शाम 7:55 से रात 10 बजे तक रहेगा। इस बार इस अवसर पर सुंदर संयोग बन रहा है, जो भी वर-वधू का जोड़ा परिणय सूत्र में बंधता है। उसका गृहस्थ जीवन सुखमय रहेगा। इसलिए 8 नवंबर को विवाह करना अत्यधिक शुभ है। इस दिन से अन्य शुभ काम भी प्रारंभ हो जाएंगे। कार्तिक मास में अन्य शुभ वैवाहिक मुहूर्त भी है। जिसमें विवाह करना मंगलमय और शुभ रहेगा। 19, 20, 21, 22, 23, 28 व 30 नवंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद दिसंबर में 1, 5 और 11 दिसंबर तक शुभ मुहूर्त रहेंगे।
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